गुरुजी गरीबों के पहरुआ हैं, आपकी तरह पंडिताई नहीं करते  

गुरुजी 

गुरुजी जैसा गरीबों का पहरुआ होना अलग बात है, पंडिताई  करना और बात  हमारे देश में लोकतंत्र और ब्राह्मणवाद का तंत्र साथ-साथ कतई नहीं चल सकता। लोकतंत्र मनुष्यता की राह पकड़ता है तो मनुवाद मनुष्यता में विच्छेदन की। एक, समाज जोड़ता है तो दूसरा तोड़ता है। आपस में दोनों एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। इसका जीवंत … Read more

जल संकट से जूझता पलामू , दिव्यान्गता और मौत के बाद भी सरकार तमाशबीन

पलामू जल संकट पर सरकार तमाशबीन

पलामू जल संकट पर सरकार तमाशबीन भाजपा के सत्ता के चार साल पूरे होने के बावजूद अब तक पलामू जल संकट से जूझ रहा है। यहाँ जल संकट की समस्या विकराल हो चुकी है। न सिर्फ शहरी क्षेत्रों में बल्कि ग्रामीण अंचलों का भी यही हाल है। वर्तमान में यहाँ की आबादी को शुद्ध पेयजल … Read more

नीलाम्बर-पीताम्बर जैसे आदिवासी अस्मिता के प्रतीक की उपेक्षा क्यों?

पलामू क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सिपाही नीलाम्बर-पीताम्बर जिन्होंने कर्नल डाल्टन जैसे दमनकारी अंग्रेज को छके छुड़ाए, उनके गाँव की उपेक्षा क्यों?

पलामू क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सिपाही नीलाम्बर-पीताम्बर जिन्होंने कर्नल डाल्टन जैसे दमनकारी अंग्रेज को छके छुड़ाए, अंत में झारखंड कि आन बचाने को शहीद हुए, उनकी उपेक्षा क्यों? पलामू झारखण्ड के पूर्वोत्तर भाग में स्थित भारत के ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। सन 1857 ई. के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह जिला इस प्रदेश का सर्वाधिक सक्रीय क्षेत्र माना जाता था। … Read more

आदिवासी भाजपा के नजरों में जमींदार और कॉर्पोरेट जगत नवगरीब

आदिवासी

रघुवर सरकार आदिवासी को जमींदार और कॉर्पोरेट जगत को गरीब एवं भूमिहीन मानती है  देश में नयी आर्थिक नीतियों के लागू होते ही कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का अर्थ किस प्रकार परिवर्तित हुआ इसका जीवंत मिसाल झारखंड के रूप में देखा जा सकता है। यहाँ के लोक शब्दों में बयाँ करें तो मौजूदा सरकार यहाँ के … Read more

झारखंड की प्रकृति और संस्कृति को ताक पर रखती सरकार

झारखंड की प्रकृति और संस्कृति को ताक पर रखती सरकार

झारखंड की प्रकृति और संस्कृति की उपेक्षा झारखंड प्रकृति की गोद में बसा वह प्रदेश है, मानो प्रकृति ने इसे अपने सान्निध्य से संवारा हो। इस जनजाति बाहुल्य राज्‍य के प्रत्येक क्षेत्र में  प्रकृति और संस्‍कृति का जबरदस्त समागम है। संस्कृति और रहन-सहन में विविधता रहने के बावजूद भी यहाँ के आदिवासियों में आपसी सौहार्द … Read more

आदिवासी क्या हिन्दू हैं और सरना धर्म जैसा कोई धर्म नहीं ?

क्या सरना धर्मवाली ही आदिवासी हैं

भाजपा एवं उसके अनुषांगी दल के ऐसे कई उदाहरण हैं जिस आधार पर कहा जा सकता है कि ये  देश की राजनीति में हमेशा दोहरा खेल खेलते हैं। जैसे झारखंड में हिन्दू-मुसलमान, जाति-पाति, 11 बनाम 13 जिले, बाहरी-भीतरी और अब आदिवासी भाई में फूट डलवाने या गुमराह करने के लिए सरना- क्रिस्चन के बीच ऐसा … Read more