सहयोगी और गठबंधन धर्म

सहयोगी और गठबंधन धर्म…इसे कहते हैं , महागठबंधन से सीखे भाजपा-आजसू!

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महागठबंधन को जिताने में समर्पित भाव से सहयोग करने के लिए जिस प्रकार तमाम सहयोगी दल तैयार हैं,  यकीनन गठबंधन धर्म की यही परिभाषा हो सकती है. 

रांची : मधुपुर उपचुनाव के प्रचार में दौर सिर्फ एक प्रत्याशी ऐसा है. जो समाज के सभी वर्गों के बीच उनके सुख-दुख को बांटते देखा जा रहा है। वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी हफीजुल हसन है। महागठबंधन ने सामूहिक बैठक कर साथ में चुनावी रणनीति बनायी। जिसमे तमाम दलों के बड़े नेता और मंत्री हफीजुल हसन के पक्ष में प्रचार करने का फैसला लिया है। कांग्रेस के कई पूर्व नेता भी प्रचार में उतर आये हैं। राजद के पदाधिकारी, कार्यकर्ता भी प्रचार करेंगे। वामदलों ने भी झामुमो को अपना समर्थन दिया है। सभी महागठबंधन को जिताने में समर्पित भाव से सहयोग करने को तैयार हैं,  गठबंधन धर्म की यही परिभाषा हो सकती है. 

जबकि एनडीए गठबंधन की परिस्थिति ठीक उलट है. जहाँ भाजपा अपने ही सहयोगी दल के नेता को अपने दल में शामिल कर, जहाँ आजसू के पीठ में छुरा घोंप दिया है। वहीं भाजपा के नए चौकड़ी के साथ, ज़मीनी नेता राज पलिवार को दरकिनार कर अपने ही कार्यकर्ताओं को राजनीति का नया सन्देश देने का सच भी है। भीतरघात से जहाँ आजसू सदमे में है। वहीं राज पलिवार को रेस से बाहर हो जाने से जहां वह सकते में है, तो उनके समर्थकों में भी रोष है. स्थिति यह है कि वह अपनी दुर्दशा का बयान शेरों-शायरी से करते देखे जा रहे हैं। 

निशिकांत दुबे ने कहा था कि महागठबंधन में भगदड़ मचेगी, लेकिन भगदड़ तो भाजपा में मची है

कुछ दिनों पूर्व भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने बयान दिया था कि सात अप्रैल को महागठबंधन में भगदड़ मच जाएगी। लेकिन फिलहाल भगदड़ तो केवल भाजपा में मची है। भाजपा के कई कार्यकर्ताओं ने झामुमो का दामन थाम लिया है। उन्हें एहसास हो चुका है कि सालों भाजपा का झंडा ढोने के बाद भी जब राज पलिवार को दूध की मक्खी की तरह फेंका जा सकता है तो फिर उनकी क्या बिसात है. 

मसलन, बाबूलाल मरांडी, दीपक प्रकाश से लेकर निशिकांत दुबे तक के चेहरे उतरे हुए हैं. वे जानते हैं कि उनसे ऐतिहासिक गलती हो चुकी है। मधुपुर में भाजपा की मिट्टी पलीद उस चौकड़ी ने खुद कर दिया है। बहरहाल गठबंधन धर्म की सीख भाजपा-आजसू को महागठबंधन से जरूर सीखना चाहिए।

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