मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा संघीय ढांचे की मजबूती के मद्देनजर लोकतंत्र का सम्मान

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मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा

मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा

  • कई केंद्रीय मंत्रियों से मिलना हेमन्त सोरेन का लोकतांत्रिक होने का परिचय है,
  • कई मुद्दों पर सहयोग की पेशकश करना झारखंडी जनता के प्रति उनकी संवेदनशीलता दर्शाता है  

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कोरोना काल में राज्य में मौजूद रह जनता का संकटमोचन बने रहे। मुख्यमंत्री का पद संभालने के पूरे एक वर्ष बाद हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा है। इस दौरान वे यूपीए नेताओं के अलावे, मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्रियों से भी मुलाकात की। हालांकि, मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के दौरान हुई केन्द्रीय नेताओं से मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री ने अपने साक्षात्कार में साफ कर दिया है कि यह नव वर्ष के अवसर पर की जाने वाली एक शिष्टाचार मुलाक़ात है। जिससे निश्चित रूप से देश का संघीय ढांचा को मजबूती मिलता है।  

जीएसटी व डीवीसी कटौती मामले में केंद्र राज्य सरकार कर रही थी टारगेट 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन हेमेशा से कहते आये हैं कि उनकी सरकार देश की संघीय व्यवस्था में विश्वास करती है। हालांकि, भाजपा का राज्य की सत्ता से बेदखल होने के बाद, हेमंत सोरेन के झारखंड विकास अभियान में केंद्र की नीतियों ने रोड़ा अटकाया। भले प्रदेश की भाजपा इकाई ने इसे नीतिगत विवाद का नाम देते रहे, लेकिन हकीकतन केंद्र द्वारा शक्तियों का प्रयोग कर हेमंत सरकार को टारगेट किया गया।

वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) के मुआवजे पर रोक और दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के बकाये के नाम पर, संकट के दौर में करोड़ों की कटौती इसी साजिश का हिस्सा भर हो सकता है। जिसे राज्य सरकार व जनता ने केंद्र के रवैये को दबाव से जोड़ कर देखी। लेकिन, झारखंड की सतह केन्द्रीय हलचल के बावजूद झारखंड के मुख्यमंत्री संघीय व्यवस्था पर विश्वास जताते हुए विराट हृदय का परिचय दिया है। जहाँ वह राजनीतिक खटास से ऊपर उठ लोकतंत्र की आत्मा का सम्मान करते दिखते हैं। 

खनिज संसाधनों के लिए केंद्र भी समन्वय बनाना चाहता हैं 

ज्ञात हो कि केंद्र के पक्षपात रवैये के बावजूद मुख्यमंत्री कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात शामिल हैं। इन मंत्रियों से मिलकर मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से सहयोग की आशा जतायी है।

ऐसा नहीं है कि बेहतर समन्वय का रूख केवल श्री सोरेन की तरफ से है। राज्य के खनिज संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर केंद्र का भी झारखंड सरकार से समन्वय बनाना उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि केंद्रीय कोयला मंत्री ने मुलाकात के दौरान उन्होंने राज्य में कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए कोल ब्लॉक्स का परिचालन जल्द शुरू करने में मदद की गुजारिश की।

केन्द्रीय सत्ता को ज्ञात है कि हेमंत का हस्तक्षेप केंद्रीय उपक्रमों को डाल सकता है परेशानी में 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर मुख्यमंत्री ने हर पहलुओं पर मजबूती से अपनी बात रखी। अमित शाह ने मुलाकात के क्रम में पूरा सहयोग करने का भरोसा दिया है। केंद्रीय मंत्री जानते है कि केंद्र सरकार का सबसे अधिक उपक्रम झारखंड में स्थित है। हेमंत सरकार का हस्तक्षेप इन उपक्रमों के समक्ष बड़ी परेशानी खड़ा कर सकती है।

मुलाकात के दौरान हेमंत सोरेन ने केंद्र के पक्षपात पर सवाल उठाय़ा। उन्होंने कहा कि उम्मीद से कम मिलता है, तो स्वभाविक रूप से सौतेला व्यवहार महसूस होता है। केंद्रीय उपक्रमों पर राज्य सरकार का 50,000 करोड़ के बकाए राशि की तरफ भी इशारा किया। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से झारखंड को केंद्र का पूरा सहयोग का आश्वासन राज्य सरकार की उम्मीदें जरुर बढ़ायी है। लेकिन भविष्य में पता चलेगा कि केंद्र का रवैया झारखंड के प्रति किस हद तक बदलेगा।

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