6 माह में ही नक्सल खात्मे का दावा करने वाली भाजपा जवानों को बुलेट प्रूफ जैकेट तक न दे सकी, हेमंत ने किया जवानों का 45 लाख का बीमा

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पुलिस

पुलिस आधुनिकीकरण में राज्य के हिस्से का 52.25 करोड़ रूपए भी भाजपा ने नहीं किया खर्च

राँची। दिसंबर 2014 में रघुवर दास ने झारखंड के मुख्यमंत्री का पदभार संभाली। ढपोरशंखी वादों के फ़ेहरिस्त में फरवरी 2015 को झारखंड की जनता से मुख्यमंत्री द्वारा एक बड़ा वादा किया गया। कहा गया कि रागुवर सरकार 6 माह में राज्य से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर देगी। इसके उपरान्त उस सरकार में डीजीपी रहे डीके पांडेय ने भी 2016 में घोषणा की कि दिसंबर 2017 में पूरे झारखंड से नक्सलियों का सफ़ाया हो जाएगा। लेकिन, नक्सलवाद तो दूर राज्य से नक्सलियों का भी खात्मा न कर सके। बकोरिया कांड का सच्चाई इसका स्पष्ट उदाहरण हो सकता है। 

दरअसल, पांच साल तक सत्ता में रही भाजपा की रघुवर सरकार की कार्यशैली में नक्सल ख़ात्मे को लेकर न कभी संजीदगी दिखी और न ही दिलचस्पी। उल्टे रघुवर सरकार ने नक्सल लड़ाई में लगे पुलिस जवानों की जान को जोखिम में डाल दिया। भाजपा सरकार में पुलिस व्यवस्था की आधुनिकीकरण की बात तो दूर, 2013-18 के पांच वर्षों के लिए बने एनुअल एक्शन प्लान तक को लागू नहीं किया गया। यह जानकारी महज चंद दिनों पहले समाप्त हुई मानसून सत्र में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा पेश की गयी रिपोर्ट से सामने आयी है। 

जबकि महज आठ माह के कार्यकाल के दौरान हेमंत की वर्तमान सत्ता में नक्सली अभियान में लगे जवानों के लिए एक बड़ी पहल हुई। हेमंत सरकार करोना महामारी के बीच भी जवानों के लिए 45 लाख का बीमा लेकर आयी।  

रघुवर सरकार की अरुचि के कारण जवानों को नहीं मिला सका बुलेट प्रूफ जैकेट, हताहत होने का खतरा बढ़ा 

वित्तीय वर्ष 2017-18 की सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्र की सीएजी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन रघुवर सरकार में पुलिसकर्मियों के पास पर्याप्त संख्या में बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं होने के कारण, नक्सल अभियान को अंजाम देने के दौरान उनके हताहत होने का खतरा बढ़ा है। साथ ही राज्य पुलिस के पास अत्याधुनिक हथियारों की भी कमी रही। ज्ञात हो कि नक्सल से लड़ रहे पुलिसकर्मियों के पास जरूरत के मुकाबले 32 प्रतिशत अत्याधुनिक हथियार की भी कमी रही।

सीएजी की रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी गयी है कि तत्कालीन रघुवर सरकार के पांच वर्षों के दौरान न तो पुलिस आधुनिकीकरण में राज्य के हिस्से का 52.25 करोड़ रुपये खर्च किये गए। और न ही 4.22 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान खर्च किया गया। नतीजतन 2016 से 2018 के बीच राज्य मद में  21.31 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान नहीं मिला। इसके कारण भाजपा सरकार में 2013-18 के 5 वर्षों के लिए बना एनुअल एक्शन प्लान भी लागू नहीं हो सका। 

जवानों के भावनाओं के साथ खिलवाड़ – भाजपा की पुरानी आदत

ऐसा नहीं है कि यह पहला मौका है, जब भाजपा सरकार में पुलिस जवानों के सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ। पहले भी भाजपा नेताओं ने जवानों के मौत पर राजनीति की है। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री ने पुलवामा हमले में शहीद जवानों के आश्रितों को आर्थिक सहायता करने का वादा किया था। इसके लिए उस सरकार में राज्यकर्मियों ने अपने एक दिन से लेकर एक महीने तक का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया था। अनुमानित तौर पर यह राशि 47 करोड़ थी, जो निश्चित रूप से शहीदों के परिजनों आर्थिक राहत पहुंचाती। लेकिन, रघुवर सरकार का वादा तो झूठा था।

45 लाख की बीमा सुरक्षा के साथ नक्सल अभियान आएगी तेजी 

राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के मद्देनजर हेमंत सरकार में हर संभव प्रयास हो रहे हैं। नक्सल अभियान को लेकर मुख्यमंत्री की सजगता, उनके निर्देशों के बाद सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ बनाने के लिए उठाये गये कई कदम, निस्संदेह दर्शाता है कि सरकार का मकसद झारखंड को नक्सलवाद की समस्या से मुक्त कराना है।

नक्सल अभियान में तैनात जवानों की चिंतामुक्ति व प्रोत्साहन हेतु 45 लाख रूपये का बीमा राज्य के सुरक्षा व्यवस्था के नीव को मजबूती देगी

हेमंत सरकार की 45 लाख रूपये का बीमा योजना की पहल निश्चित रूप से नक्सल अभियान में तैनात सुरक्षाबलों को चिंतामुक्त करते हुए राज्य की सुरक्षा में उन्हें सतप्रतिशत योगदान देने को प्रोत्साहित करेगा। बीमा योजना का लाभ नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कार्यरत सभी अधिकारियों और सुरक्षाबल के जवानों को मिलेगा। नक्सली मुठभेड़ में किसी पुलिसकर्मी के शहीद होने पर उनके परिवार के सदस्यों को 45 लाख और घायल होने की स्थिति 15 लाख रुपये सरकार देगी। 

टारगेट बेस्ड चलेगा अभियान

हेमंत सरकार ने फैसला किया है कि राज्य में माओवादियों और दूसरे स्पलिंटर ग्रुप के खिलाफ टारगेट बेस्ड अभियान चलाया जाएगा। डीजीपी ने समीक्षा बैठक में कहा है कि सीआरपीएफ के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर मानसून के बाद बड़ा नक्सल विरोधी अभियान चलाने की रणनीति पर काम करेगी। बैठक के दौरान जिलों में नक्सली संगठनों की गतिविधि, उनके खिलाफ चलाए गए अभियान, स्पलिंटर ग्रुप के खिलाफ की गई त्वरित कार्रवाई पर भी फैसला लिया गया है।

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