दूसरे राज्य के आरक्षित-कोटे के जातियों को झारखण्ड में आरक्षण-लाभ नहीं

Share on facebook
Share on telegram
Share on twitter
Share on whatsapp
आरक्षण

दूसरे राज्य के आरक्षित-कोटे में आने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य जातियों को झारखण्ड में आरक्षण का लाभ अब नहीं मिलेगा  

अगस्त 2009 में भारतीय उच्चतम न्यायालय के जस्टिस एसबी सिन्हा और सिरिएक जोज़ेफ़ की खंडपीठ के एक दूरगामी आदेश में कहा गया था कि  “अनुसूचित जाति, जनजाति, व् अन्य आरक्षित-कोटे में आने वाली जातियों के लोग आरक्षण की माँग नहीं कर सकते अगर वो एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं और दूसरे राज्य में उनकी जाति या वर्ग आरक्षित समुदाय की सूची में नहीं है।”

इसके मायने यह हुआ कि अगर अगर बिहार, केरल या असम में रहने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति या फिर ओबीसी वर्ग के लोग दिल्ली या मुंबई आते हैं तो उन्हें वहाँ राज्य सरकारों के संस्थानों में आरक्षण की सुविधा नहीं मिलेगी। इस आदेश का असर केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों और केंद्र सरकार की नौकरियों पर नहीं पड़ेगा। खंडपीठ का यह आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले पर आया था जिसमें उच्च न्यायालय ने दूसरे राज्यों के पिछड़ी जाति के प्रत्याशियों को दिल्ली में आरक्षण का लाभ पाने की अनुमति दे दी थी।

उस वक़्त केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के सामने अपनी दलील में कहा था कि जिन्हें अपने राज्यों में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग का दर्जा मिला हुआ है, अगर वो दूसरी जगह जाते हैं तो उन्हें उस दर्जे का लाभ मिलना चाहिए। ख़ासकर उन लोगों को जो लोग दिल्ली में पाँच वर्ष से ज़्यादा से रह रहे हों या फिर उनका जन्म और पालन पोषण दिल्ली में ही हुआ हो। लेकिन उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार की इस दलील को मानने से इनकार कर दिया। खंडपीठ का कहना था कि एक जाति या वर्ग के लोगों को किसी एक राज्य में रहने से नुक़सान हो सकता है लेकिन ज़रूरी नहीं कि उन्हें वैसा ही नुक़सान या घाटा दूसरे राज्य में रहने से हो। साथ ही खंडपीठ ने कहा कि यही नियम अल्पसंख्यकों पर भी लागू होता है।

ऐसा ही एक मामला झारखंड प्रदेश में देखा गया जहाँ सरकार ने कई प्रार्थियों को दूसरे राज्य का निवासी बताते हुए आरक्षण का गलत लाभ ले सिपाही पद पर बहाल होने का आरोप में सेवा से हटा दिया था। इस आदेश को हाइकोर्ट में चुनौती दी गयी, जहाँ एकल पीठ ने सरकार के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि बिहार व दूसरे राज्यों के आदिवासियों, पिछड़ों व अनुसूचित जाति के लोगों को झारखंड में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। बिहार के स्थायी निवासी को झारखंड में आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। हाइकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए अपील याचिका खारिज कर दी। मसलन, मुख्यमंत्री ने फैसले का स्वागत करते हुए स्वास्थ्य सचिव को नियमानुसार नियुक्ति का निर्देश दिया है।

Leave a Replay

DON’T MISS OUT ON NEW POSTS

Don’t worry, we don’t spam. Click button for subscribe.