2014 का पाक विपक्षी चेहरा 2020 में दाग़दार!

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2014

झारखंड में 2014 और 2020 का अंतर केवल तारीख भर का नही है, बल्कि सपने जगाने का खेल खत्म होने का है, जहाँ पांच बरस में कैसे कोई सत्ता हाफंने लगती है। बीते पांच बरस में जो चेहरा धरने पर बैठी जनता पर लाठी बरसाने की स्थिति में दिखती थी, वह आज खुद धरने पर बैठी दिखती है। पांच बरस बाद, पांच बरस पहले का वातावरण फिर से बनाने के लिये वह क्या क्या कह सकता है, सबकुछ इन दो तारिखो में जा सिमटा है।

2014 के दौर में जो चेहरे उत्साह, उल्लास के साथ बतौर विपक्ष के तौर पर दिखता था, वही उम्मीद को फिर से जगा कर सत्ता पाने की बेताबी उस चेहरे पर तो साफ़ छलकता है। लेकिन तब तो वह सपनों के आसरे जनता में भरोसा पैदा करने के लिये सिस्टम-सत्ताधारियो के प्रति गुस्सा दिखाया था। लेकिन अब वैसा कुछ पाने में उसके ही पाँच बरस का सिस्टम-सत्ताधारियो की छवि आड़े आ खड़ा हुई है। जो उसके कर्रप्ट होने की काली कहानी बयाँ करती है। 

19 महत्वपूर्ण विभाग, जिसमे पथ निर्माण विभाग में हुए भ्रष्टाचार के प्रारंभिक जांच में कई मामले सही पाए गए हैं। पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख रास बिहारी सिंह को सस्पेंड भी कर दिया गया है। आशंका यह भी जताए जा रहे हैं कि यह ‘टेंडर घोटाला’ करोड़ों का नहीं बल्कि अरबों रुपये का हो सकता है। मुखिया रघुवर दास पर इसपर रोक लगाने की जिम्मेवारी थी, लेकिन बतौर मंत्री व मुख्यमंत्री कोई कार्रवाई न करना उनपर कई सवाल खड़े करते हैं।  

2014 में हुए टेंडर घोटाला का सच

आरोप है कि सचिव राजबाला वर्मा के कार्यकाल में विभाग में घोटाला हुआ, लेकिन तब राजबाला वर्मा पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें मुख्य सचिव बना दिया गया। जबकि सरयू राय जो उसी सरकार के मंत्री थे, ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री को सूचित भी किये थे कि रास बिहारी सिंह की भूमिका मामले में संदिग्ध है। इसके बावजूद रघुवर दास का मामले पर चुप्पी साधे रहना और प्रधान सचिव के आदेश के बाद भी विस्तृत जानकारी छुपाया जाना, मामले को संदेहास्पद की कड़ी में ला खड़ा करता है। 

पथ निर्माण विभाग ने जिस सूरत की यूनिक कंस्ट्रक्शन कंपनी को न केवल बिना टेंडर डाले 51.62 करोड़ का ठेका दिया, बल्कि 4 करोड़ रुपये मोबिलाईजेशन अमाउंट सहित कुल 7.65 करोड़ भी दिये। ऑडिट में आपत्ति जताए जाने के बाद उस यूनिक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने नोटिस के जवाब में जांच का आग्रह करते हुए कहा कि वह न तो झारखंड में कोई काम कर ही रही है और न ही पथ निर्माण विभाग से कोई एडवांस लिया है, सभी को चौंकाता ज़रूर है। मसलन 2014 में खुद को साफ़ बताने वाल विपक्षी चेहरा 2020 में निकला दागदार।

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