बहरागोड़ा के समीर मोहंतीे ने जनता के सलाह पर झामुमो का दामन थामा

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बहरागोड़ा के समीर मोहंतीे

बहरागोड़ा के समीर मोहंतीे ने सारी अटकलों को ख़ारिज करते हुए आख़िरकार अंतिम वक़्त में भाजपा को नकारते हुए झामुमो का दमन थाम लिया। जनता के मन को टटोलने के लिए उन्होंने बहरागोड़ा विधानसभा के अलग अलग क्षेत्रों में मत पेटी भेजा थे, जिसमे उन्होंने  जनता से राय मांगे थे कि क्या उन्हें इस बार चुनाव लड़ना चाहिए? यदि लड़ना चाहिए तो किस दल के प्रत्याशी के रूप में उन्हें लड़ना चाहिए? सभी जगहों से मत पेटी वापस आने के बाद जब उन्होंने उसे खोला, तो उस क्षेत्र के अधिकांश लोगो ने सलाह दी थी कि वे झारखंड मुक्ति मोर्चा से चुनाव लड़ें।

झारखंड खबर ने पहले ही सर्वे के आधार पर दावा किया था कि समीर मोहंती झामुमो से चुनाव लड़ सकते हैं और कुनाल षाडंगी के लिए चुनौती बन सकते हैं। मत पेटियां में आये सलाह से वे निर्भिक हो भाजपा को नकारते हुए झामुमो में जाने का न केवल फैसला लिया, बल्कि समय न गवाते हुए उन्होंने आज ही हेमंत सोरेन की उपस्थिति में झामुमो का दामन थाम लिये। ज्ञात हो कि झामुमो के  बहरागोड़ा विधायक इन्हीं को सियासी दोस्त बनाने के लिए भाजपा का दामन थामे थे। गर्दिशों ने किसे बक्शा है, जिन्हे वे सियासी मित्र बना अपनी चुनावी वैतरणी पार करना चाह रहे थे, उसे ही जनता सियासी शत्रु बना मैदान में उतरने का फरमान सुनाया।

कौन है ये बहरागोड़ा के समीर मोहंतीे

बहरागोड़ा के समीर मोहंतीे वर्त्तमान में भाजपा के कार्यसमिति सदस्य और भाजपा नेता थे। इन्होंने लगातार चुनाव लड़ी है। 2005 में इन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मैं चुनाव लड़ा, 2009 में आजसू की टिकट पर लड़ा, फिर 2014 के चुनाव में झाविमो में शामिल हो गए और कंघी छाप के उम्मीदवार बने। इस बार ये तीसरे नंबर पर रहे। गौर करने वाली बात यह है कि दूसरे नंबर पर रहने वाले भाजपा प्रत्याशी और मोहंती के बीच महज 100 वोटों का ही अंतर था। कुनाल षाडंगी के दल बदलने के बाद 2019 के होने वाले विधानसभा चुनाव में झामुमो में शामिल होने से ये बहरागोड़ा का सबसे प्रबल उम्मीदवार माने  जा रहे हैं।

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