ढुल्लू-रघुबर भाई-भाई के नारों से गूंजता झारखण्ड के राजनितिक गलियारे 

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ढुल्लू-रघुबर भाई-भाई

ढुल्लू-रघुबर भाई-भाई

रघुबर दास की लूट व मुनाफ़े पर टिकी व्यवस्था में भाईचारगी व भावनाएँ भी जाति के हिसाब से तय होती है। ढुल्लू-रघुबर भाई-भाई के नारे से गूंजती झारखण्ड के राजनैतिक गलियारे इसका स्पष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री जी का जाति प्रेम इतना उफान पर है कि जहाँ राज्य में विपक्ष के किसी नेता-विधायक पर ऊँगली उठने के सवाल भर से उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो जाती है या उनकी गिरफ्तारी हो जाति है, वहीं बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो के कारिस्तानियों को सह दी जाती है। यह सहज ही समझा जा सकता कि इसके पीछे आखिर मुख्यमंत्री जी की मंशा क्या है? असल में शायद इसे ही जाति प्रेम कहा जाता है।

बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो के काफ़िले में भी केवल एक ही नंबर 5252 की गाड़ियाँ चलती हैं, जो चर्चा का विषय है। यह बाहुबली विधायक एएसआई अरुण कुमार शर्मा के साथ धक्का-मुक्की करने के मामले में आरोपी हैं, लेकिन फिर भी यहाँ के सड़कों पर बेख़ौफ़ घूमते हैं। इस विधायक की तो अजब कहानी है, रंगदारी के कई आरोपों के बावजूद चरित्रवान का सर्टिफिकेट ले कर बेख़ौफ़ घूमते नजर आते हैं। साथ ही कतरास मंडल महिला मोर्चा की अध्यक्ष रह चुकी भाजपा नेत्री के यौन शोषण के आरोपों से घिरे बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो के माथे पर कोई सिकन नहीं देखी गयी है। जबकि यह महिला नेत्री पार्टी में पिछले 15 वर्षों से सक्रिय है।

ऐसा नहीं है कि बाघमारा विधानसभा कोर कमेटी के सदस्य के तौर पर इस महिला नेत्री ने न्याय के लिए भाजपा के दफ्तरों की दहलीज़ नहीं खटखटाई, लेकिन इन्हें न्याय के बदले मिली धमकी। फिर भी वह वह विधायक जी पर कोई कार्रवाई न होते देख उसने 22 नवंबर, 2018  को कतरास थाना के समक्ष आत्मदाह की कोशिश तक की, फिर भी उसे न्याय न मिला। अंततः झारखण्ड हाइकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए टिप्पणी की और सरकार से भी जवाब देने को कहा। फिर भी रघुबर सरकार अब तक चुप है।, इस बाहुबली विधायक के खिलाफ सरकार का कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाना यही तो इशारा करता है कि ढुल्लू-रघुबर भाई-भाई। 

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