आदिवासी प्रतीकों की प्रतिमाएं आखिर क्यों तोड़ी जा रही हैं?

Share on facebook
Share on telegram
Share on twitter
Share on whatsapp
आदिवासी प्रतीकों

आदिवासी प्रतीकों …राजू मुर्मू की कलम से …

झारखंड विरोधी तत्वों ने रांची, कोकर में स्थित झारखंडी व आदिवासी प्रतीकों के प्रतीक धरती आबा बिरसा मुंडा की स्थापित प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर सीधे तौर पर झारखंडी समाज पर हमला व अपमान किया है। रांची महाविद्यालय का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय रखे जाने के दिन ही स्पष्ट हो गया था कि धरती आबा के समाधी और उनके प्रतिमा पर वर्ष में दो दिन फूलमाला चढ़ाने वाले ही उनके विरोधी हैं। वे ऐसा दिखावा केवल आदिवासियों के वोट बटोरने के लिए करते हैं। यह कोई आम घटना नहीं है बल्कि झारखंड विरोधियों की एक सोची-समझी साजिश का नतीजा है जो स्पष्ट दर्शाता है की विरोधी लोग अब धरती आबा को बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं।  

पिछले वर्ष भी देश में जगह जगह प्रतिमाओं की तोड़ने कई घटनाएँ हुई। सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि भागलपुर ज़िले के काझा गाँव में 27 फरवरी 2019 की रात प्रतिमा तोड़ने वाले संगठनों ने प्रथम स्वतंत्रता सेनानी बाबा तिलका मांझी की मूर्ति को खंडित कर दिया गया। वर्ष 2017 के अप्रैल माह में गम्हरिया कांड्रा थाना क्षेत्र के नागाडुंगरी में स्थित सिदो-कान्हू की प्रतिमा को भी तोड़ दिया गया था। वर्ष 2018 के मार्च महीने में दुमका ज़िले के पोखरा चौक में स्थापित संताल हुल के महानायक सिदो मुर्मू एवं कान्हू मुर्मू की प्रतिमा में सड़ी-गली मछलियों के बोरे टांग इन्हें अपमानित किया गया, जो की बेहद शर्मनाक थी। पिछले वर्ष 2018 को भी भोगनाडीह में सिदो-कान्हू की प्रतिमा तोड़कर द्वेष फैलाने का एक मामला प्रकाश में आया था। उत्तर प्रदेश में भी कुछ मूर्ति तोड़ने वाले संगठनों ने बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ी थी।

महापुरुषों की प्रतिमाएं तोड़ने का मामला देश के कोने-कोने मे चल रहा है। चाहे जिस किसी समूह या संगठन ने हमारे शहीद नायकों कें साथ ऐसा किया है निश्चित ही घृणित मानसिकता का परिचय दिया है। इन मामलों में चौकाने वाली बात यह है की प्रतिमा तोड़ने वाले गिरोह प्रशासन की नज़रों से साफ बच निकलते हैं। प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्यवाही तक नहीं की जा रहे है। अपराधियों की शिनाख़्त तक नहीं हो पा रही है। क्या ऐसे मूर्ति तोड़ने वालों को राजनीतिक संरक्षक प्राप्त है? ऐसे में यह संभव है कि सत्ताधारी नेताओं के इशारे पर यह घटनाएं अंजाम दी जा रही हों। इस तरह आदिवासी वीर शहीदों की प्रतिमाओं को तोड़ने के भयानक षड्यंत्र के पीछे आपसी सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास हो रहा है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि सरकार जल्द से जल्द दोषियों पर कार्रवाई कर सच सामने लाये।

Leave a Replay

DON’T MISS OUT ON NEW POSTS

Don’t worry, we don’t spam. Click button for subscribe.