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बच्ची ट्विंकल की निर्मम हत्या पर देश में फिर एक बार उबाल

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समाज में इन दिनों बच्ची व स्त्रियों पर अत्याचार तेजी से बढ़े हैं। बलात्कार, क़त्ल, छेड़छाड़, मारपीट, अगवा, आदि के कारण पूरे देश का मंजर खौफ़नाक हो चुके हैं। स्त्री विरोधी मर्द मानसिकता हर क़दम पर स्त्रियों को शिकार बना रही है। विशेष तौर पर सियासी सरपरस्ती में पलने वाले स्त्रियों को अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं। उन्नाव और कठुआ की दरिंदगी और देश भर में महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती यौन हिंसा इसके सबूत हैं। स्थिति यह है कि सामूहिक बलात्कार जैसे घिनौने अपराध को अंजाम देने वाले अपराधी लम्बे समय तक बाहर आज़ाद घूमते रहे हैं और पीड़ित व उसके परिवार को डराते-धमकाते भी रहे हैं।

योगी के राज्य अलीगढ़ से ऐसी ही घटना प्रकाश में आया है जिससे लोगों के बीच भारी आक्रोश देखा जा है और साथ ही सरकार के क़ानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रहे हैं अलीगढ़ के टप्पल की एक बच्ची ट्विंकल 31 मई को घर से लापता हो जाती है बच्ची के परिवार वाले निकट थाने में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखवाते हैं, लेकिन पुलिस कोई सुराग न लगा पाती है लोगों को इस घटना की जानकारी 5 दिन बीत जाने के बाद होती है जब उन्होंने कुछ कुत्तों को कूड़े के ढेर में बदबूदार लाश जैसी चीज को नोंचते देखते हैं आशंका तो जताई जा रही है कि ढाई साल की बच्ची के साथ रेप हुआ है लेकिन बाद में अलीगढ़ के एसएसपी आकाश कुलहरी ने बयान दिया है कि बच्ची की मौत की वजह गला दबाना है

बहरहाल, हमें ऐसी व्यवस्था का विकल्प सोचना ही पड़ेगा जो औरतों को माल और सामान की तरह पेश कर रहे हैं। बेशक व्यवस्था परिवर्तन का यह रास्ता लम्बा है पर हमें शुरुआत तो कहीं से करनी ही पड़ेगी। इसका बीड़ा न सिर्फ़ युवा लड़कियों, औरतों को खुद उठाना पड़ेगा बल्कि इन्साफ़ के हक़ में खड़े नौजवानों, मर्दों को भी कन्धे से कन्धा मिलाकर बिना जाति पाति को बिच में लाये साथ खड़ा होना होगा। आज न्याय का यही तकाज़ा है।

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