दि हिन्दू

दि हिन्दू ने उठाया चौकीदार के देशभक्ति से पर्दा

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

 दि हिन्दू ने फिर खोले चौकीदार के राफेल राज 

अंग्रेजी अखबार ‘ दि हिन्दू ’ ने दावा किया है कि चौकीदार ने राफेल सौदे की मानक प्रक्रिया में दखल देते हुए ऑफसेट समझौते में फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन और एमबीडीए को ‘असाधारण’ और ‘अभूतपूर्व’ छूट प्रदान कीइस छुट कारण इन दोनों कंपनियों ने रक्षा संस्करण प्रक्रिया, 2013 के प्रावधानों का पालन नहीं किया रक्षा प्रसंस्करण प्रक्रिया-2013 के अनुच्छेद 9, जो ऑफसेट समझौते में मध्यस्थता का प्रावधान करता था और अनुच्छेद 12 जिसके मदद से औद्योगिक आपूर्तिकर्ताओं के खातों को देखा जा सकता है, हटा लिए गए

चौकीदार के दखल से मानक खरीद प्रक्रिया के तहत रक्षा समझौते में किसी भी तरह के ‘अनुचित प्रभाव’ और ‘एजेंट कमीशन’ पर प्रतिबन्ध जैसे दो अन्य गंभीर और नियंत्रण रखने वाले प्रावधानों को भी इस समझौते से चुपचाप हटा ही नहीं लिए गए बल्कि इतना ही नहीं चालाकी से सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से भी इस छेड़छाड़ की बात भी छिपा लीदि हिन्दू ने तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए यह भी लिखा कि इस सौदे में स्वयं चौकीदार ने अपने स्तर पर हस्तक्षेप कर अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए मानक खरीद प्रक्रिया को तोड़ा-मरोड़ा और इस ऑफसेट समझौते में मन-मुताबिक़ बदलाव कर दसॉल्ट एविएशन को फायदा पहुंचाया

बहरहाल, यह रिपोर्ट चौकीदार व उनकी सरकार के देशभक्ति के ओढ़े चोले से पर्दा उठने के लिए काफी है। वैसे भी सही तो यही होता कि सरकार ‘’देशभक्ति’’ से बजबजाते कॉरपोरेट घरानों, दूसरे धनी वर्गों, ‘’देशभक्ति’’ बेचकर मोटी कमाई करने वाले टीवी चैनलों के मालिकों, फ़िल्मी सितारों और जंग-जंग का नारा लगा रहे ख़ुशहाल भक्तों पर ‘’युद्ध टैक्स’’ या ‘’पाकिस्तान टैक्स’’ लगा देती। लेकिन मोदी जी तो ठहरे इन्हीं वर्गों के  चाकर तो यह भला ऐसा कैसे करेगी?

फिर तो केवल यही उपाय बाक़ी बचता है कि सरकार केन्द्रीय आयोजना ख़र्च में पहले से हो रही कटौती की गति को और तेज़ कर दे। जिसका सीधा मतलब होगा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग़रीबी उन्मूलन, रोज़गार, बिजली उत्पादन, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, कृषि उत्पादकता में वृद्धि, रेल और यातायात सुरक्षा जैसे मदों में और कटौती। जो कसर रह जायेगी, उसे पूरा करने के लिए विदेशी क़र्ज़ का रास्ता तो है ही, जिसके लिए साम्राज्यवादी तगड़ी शर्तें रखेंगे और इन क़र्ज़ों को चुकाने के लिए भी जनता की जेब पर ही उाका डाला जायेगा। यह है सरकार की ‘’देशभक्ति’’ की कीमत। इतने तथ्यों से अगर किसी को इस सरकार की असलियत न साफ़ हुई हो तो आने वाले दिनों की हक़ीक़त उसे इसका अहसास बख़ूबी करा देगी।

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Related Posts