कोंग्रेस की खुद की सर्वे में झामुमो की ज़मीन भारी

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झारखंड में महज चंद दिनों पहले यह खबर तमाम अखबारों का शीर्षक थी कि आगामी लोकसभा-विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी महागठबंधन ने सीट शेयरिंग का फार्मूला आपसी तालमेल से तय कर लिया है। जिसमे लोकसभा के लिए कोंग्रेस को 6 सीट, झामुमो को 4 सीट, झाविमो को 2 सीट और राजद व वाम दल को एक-एक सीट दिए जाने की बात कही गयी थी। जबकि विधानसभा के लिए कोंग्रेस को 20 सीट, झामुमो को 30 सीट, झाविमों को 15 सीट और राजद व वाम दल को क्रमशः 8 और 5 सीटें दिए जाने की चर्चा थी। साथ ही 3 सीट सुरक्षित रखे गए थे। महागठबंधन ने सर्व सम्मति से हेमंत सोरेन को अपना नेता अर्थात मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में स्वीकार कर लिया था।

इसी के साथ कई संशय की स्थिति बरकरार थी जैसे- झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी और प्रदीप यादव कोडरमा, गोड्डा और चतरा सीट पर दावा ठोंक रहे थे जबकि गोड्डा सीट पर कोंग्रेस के फुरकान अंसारी दावा कर रहे हैं। गीता कोड़ा को चाईबासा सीट मिली तो झामुमो खूंटी पर दावा करेगा। वहीँ कांग्रेस को हजारीबाग या चतरा सीट छोड़नी पड़ सकती है और राजद का पलामू-चतरा सीट पर दांव है।

परन्तु विश्वास पात्र सूत्रों के माध्यम से अब जो खबर निकल कर सामने आ रही है वह कहानी कुछ और बयान कर रही है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस द्वारा खुद के करवाए सर्वे के प्राप्त आंकड़े ने सीटों के गणित को फिर से फेरबदल करने पर मजबूर कर दिया है। जो आंकड़े निकल कर सामने आ रहे है उसमें झामुमो की ज़मीन भारी है। लोकसभा के लिए कांग्रेस को 4 सीट (रांची, हजारीबाग, धनबाद और खूंटी), झामुमो को 6 सीट (राजमहल, दुमका, गिरिडीह, चाईबासा, जमशेदपुर और लोहरदगा), झाविमो को 2 सीट (कोडरमा और गोड्डा) और राजद व वाम दल को एक-एक सीट (चतरा एवं पलामू) दिए जायेंगे तो ही तमाम सीटों पर जीत सुनिश्चित हो सकती है। जबकि विधानसभा के लिए कांग्रेस को 18 सीट, झामुमो को 42 सीट, झाविमो को 11 सीट और राजद व वाम दल को क्रमशः 5-5 सीटें दिए जाने से भाजपा को आसानी से पटकनी दी जा सकती है।

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