फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वालों की होगी जाँच

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फर्जी डिग्री

कई सरकारी रिपोर्ट पढ़ने से यह समझा जा सकता है कैसे देश में फर्जी डिग्री सबसे बडा बिजनेस। रिपोर्ट के अनुसार पता चलता है कि देश में 21 यूनिवर्सिटी कैसे फर्जी डिग्री बांटते हैं कि 10 लाख से ज्यादा छात्र बिना कालेज गये डिग्रीधारी बन जाते है। शायद यही वह वजह है जहाँ राज्य में नौकरी के लिए डिग्री पढाई से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। 2015 में बिहार में फर्जी डिग्री पर जांच के डर से 1400 टीचरों ने नौकरी से इस्तीफा दिया। राजस्थान में 1872 सरपंच चुने गए, जिनमें 746 के खिलाफ फ़र्ज़ी डिग्री और मार्कशीट लगाने के आरोप हैं। 479 के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई।

मई 2015 में लखीमपुर खीरी में 29 फर्जी डिग्री धारक शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षकों को पकड़ा गया। दक्षिण कश्मीर के एक स्कूल टीचर मोहम्मद इमरान खान से खुली अदालत में जज ने गाय पर निबंध लिखने को कहा तो वो लिख नहीं पाया क्योंकि पढ़ाई कभी की नहीं थी और फर्जी डिग्री के आधार पर टीचर बना था। तो नौकरी पाने के लिए देश में पढाई नहीं डिग्री चाहिए। इसीलिये डिग्री पाने के लिए पढ़ाई जरुरी नहीं है। मानव संसाधन मंत्रालय ने भी 21 यूनिवर्सिटी को ब्लैक लिस्ट किया था। बावजूद इसके न खेल रुका और न ही इसे देकर नौकरी की चाह।

एप्लायमेंट बैकग्राउंड चैक सर्विस प्रदान करने वाली फर्म राइट की नयी रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2014 से अप्रैल 2015 तक भारत में कुल 2 लाख लोगों की डिग्री का निरीक्षण किया गया, जिसमें 52 हजार डिग्री फर्जी पायी गई। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि सरकार का नजरिया कभी शिक्षा पर रहा ही नहीं तो फर्जी डिग्री से किसी का क्या लेना देना। लेकिन झारखण्ड में विभिन्न जगहों पर सीसीएल, बीसीसीएल सहित दूसरे कोल कंपनियों में फ़र्ज़ी कागज़ात बना कर नौकरी व मुआवजा लेने वालों के खिलाफ सरकार जांच करेगी।

प्रभारी मंत्री जगन्नाथ महतो ने सदन में बताया कि गलत तरीके से कई जगहों पर इसका लाभ लिया गया है। उन्होंने कहा सरकार के पास विस्तृत रिपोर्ट है, जमाबंदी की जांच की प्रक्रिया चल रही है़ सीओ के माध्यम से जांच हो रही है़ जांच में गलत पाये जाने वालों की नौकरी व मुआवजा वापस लिये जायेंगे।

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