मुर्गों यह जान लो फैसला तो हो चुका है
अलग झारखंड काल से दस साल पहले देश ने निजीकरण, उदारीकरण और वैश्वीकरण को स्वीकार किया। चलिए, निजीकरण को एक छोटी सी कहानी के जरिए समझते हैं। कुछ साल पहले की बात है। मुर्गों की एक बड़ी मीटिंग बुलाई गयी। देश भर से मुर्गे-मुर्गियां, उसके चुजे, बड़े मुर्गे इस मीटिंग में शामिल हुए। मीटिंग में … Read more