उधड़ी हुई सी है झारखंडी बुनकरों की जिंदगी

आरोप लगाया कि सरकार बुनकर दिवस के दिन करोड़ों की राशि खर्च कर सिर्फ दिखावा कर रही है। यह ना तो बुनकरों के हित में है और ना ही इससे झारक्राफ्ट को किसी प्रकार का फायदा पहुँचने वाला है। यह केवल एक छलावा है।

अबतक वनक्षेत्र के 50,000 हेक्टेयर भूमि लूटा चुकी है यह सरकार

Jharkhand forest

इनके कथन आज भी कितने प्रासंगिक हैं, हम झारखंडी एक तरफ हिन्दू-मुसलमान में उलझे रहें और दूसरी तरफ हमारे जंगलों से लगभग 50 हजार हेक्टेयर भूमि को उड़ा लिया गया। और हमारे मुख्यमंत्री जो कि खुद वन मंत्री हैं, को इसका पता भी न चल सका। कैसे इस सेवक पर विश्वास किया जाय?   

सावधान! यह अपशब्द नहीं एक प्रकार का उकसावा है

उकसावा

सरकार झूठे मुद्दे उछालने, लम्‍बे-चौड़े हवाई वायदे करने, जुमलेबाज़ियों और नफ़रत फैलाने के ज़रिये असली मुद्दों को हाशिये पर धकेल देने की रणनीति में हिटलर और मुसोलिनी का काबिल वारिस साबित हुआ है। इतिहास में हुई अपनी दुर्गति से सीखकर आज फ़ासीवादी राजनीति खुले-नंगे रूप की जगह संसद और संवैधानिक संस्थाओं का आवरण ओढ़कर अपनी नीतियों को लागू कर रही है।

राज्य की 50 फीसदी आधी आबादी बेरोजगार: बेरोजगारी…भाग 4

Unemployment

15-34 आयुवर्ग की महिलाओं में औसत बेरोजगारी दर लगभग 50 प्रतिशत है। जिससे यह साफ़ दिखता है कि किस प्रकार युवतियों को यह सरकार रोजगार से दूर रखी हुई है। इस आंकड़े को जब हम आयु वर्ष में विभक्त कर देखते हैं तो मामला और भी भयावह प्रतीत होता है।

बेरोजगारी…भाग 3: बाल मजदूरी बनी झारखण्ड की पहचान

Berojgaari

जो व्यवस्था सभी हाथों को काम देने के बजाय करोड़ों बेरोज़गारों की विशाल फौज में हर रोज़ इज़ाफा कर रही है, जिस व्यवस्था में करोड़ों मेहनतकशों को दिनो-रात खटने के बावज़ूद न्यूनतम मज़दूरी तक नहीं मिलती, उस व्यवस्था के भीतर से लगातार बाल-मज़दूरों की अन्तहीन क़तारें निकलती रहेंगी।

15वें वित्त आयोग केंद्रीय सिफारिशों को आधार मानती है

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जैसा कि सभी को ज्ञात है कि भारतीय वित्त आयोग का गठन राष्‍ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान की धारा 280 के तहत 1951 में किया गया। इस आयोग को केंद्र और राज्‍य के मध्य वित्तीय संबंधों को परिभाषित करने के लिए अस्तित्व में लाया गया था। वित्त आयोग के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा एक अध्यक्ष और चार … Read more