राशन कार्ड अगर रघुवर सरकार ने रद्द न किये होते तो राज्य की स्थिति मजबूत होती 

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राशन कार्ड

बिना राशन कार्ड वालों को राशन दे रही हेमंत सरकार 

केंद्र सरकार द्वारा कोविड -19 संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की गई। लेकिन इस दौरान एक सच यह  भी उभर कर सामने आया है कि जिन परिवारों को, सामान्य सामाजिक कल्याण योजनाओं से बाहर रखा गया था, वह भुखमरी से बुरी तरह प्रभावित हैं। इसके एक मायने यह भी है कि 26 मार्च को घोषित केंद्रीय राहत योजना के तहत मिलने वाले प्रति व्यक्ति प्रति माह अनाज से ये परिवार वंचित हो गए।

मौजूदा वक़्त में केंद्रीय खाद्य सुरक्षा योजना केवल देश के 62 प्रतिशत आबादी को ही लाभ पहुँचाती है, और  देश के एक बड़ी आबादी इससे वंचित रह जाती है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभार्थियों की सूची पांच वर्षों से अपडेट नहीं किया जाना इसका प्राथमिक कारण है। और दूसरा कई नवविवाहित महिलाओं व बच्चों को शामिल नहीं किया जाना है। और जब हम एक आपातकालीन स्थिति में हैं तो सरकार को जल्द खाद्य सब्सिडी योजना को सरल बनाना चाहिए ताकि कोई भी भूखा न रहे।

रघुवर सरकार ने लाखों राशन कार्ड रद्द किये थे

उदाहरण के तौर पर इसका भयावह स्थिति झारखण्ड में देखा जा सकता है। जहाँ की जनता अपनी भूख मिटाने के लिए राशन कार्ड को तरस रही है। राज्य की पिछली भाजपा वाली रघुवर सरकार ने वहां के ग़रीबों का हक मारते हुए लाखों राशन कार्ड रद्द कर दिए थे। अगर ऐसा नहीं किया होता तो आज झारखण्ड की बड़ी आबादी भूख से परेशान न होती। Scroll.in अपने एक प्रकाशित लेख में लिखा था कि झारखंड सरकार ने जिन 90 प्रतिशत राशन कार्ड को 2016 और 2018 के बीच अवैध घोषित किए थे, असल में वह अवैध नहीं बल्कि असली घरों के थे।

बहरहाल, राज्य की वर्तमान हेमंत सरकार की संवेदनशीलता के कारण वैसे लोगों को भी राशन मिल पा रहा है जिनके राशन कार्ड रद्द कर दिए  गए थे या जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। इसके साथ दीदी किचन, दाल-भात योजना, पुलिस कमुनिटी आदि कई माध्यमों से ग़रीबों की भूख मिटाने का प्रयास भी उस राज्य किये जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय खाद्य निगम वर्तमान में 21 मिलियन टन के बफर मानदंडों की तुलना में 78 मिलियन टन चावल और गेहूं के बड़े भंडार पर बैठा है। फिर भी, गरीब परिवारों को लक्षित पीडीएस सूची से बाहर रखना अनुचित ही नहीं अमानवीय भी है, अतः सरकार को यह भंडार तत्काल ही राहत कार्य के लिए लगाना चाहिए। ताकि कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई जीती जा सके। 

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