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रघुवर के राज में धनबाद के अवैध कोयला सिंडिकेट की बल्ले-बल्ले

रघुवर के राज में धनबाद के अवैध कोयला सिंडिकेट की बल्ले-बल्ले

‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ जैसे लोकलुभावन नारों के पीछे खड़े होकर सत्ता में आयी झारखण्ड की रघुवर सरकार केंद्र की मोदी सरकार का पोल अनुराग कश्यप की रिपोर्ट खोल रही है। स्मरण रहे कि इससे पहले भी नकली शराब बनाने जैसे गैर कानूनी कारोबार में भी भाजपा नेता का नाम सामने आया है। अब कश्यप जी की इस रिपोर्ट के अनुसार झारखण्ड के धनबाद जिले में ही पिछले तीन सालों में चौतरफा कोयले के अवैध कारोबार में धड़ल्ले ने सरकार की क़ानून व्यवस्था को धत्ता बता दिया है। अपने रिपोर्ट में यह आरोप लगाते है कि झारखण्ड की इस सम्पदा की लूट में कई राजनेता, उनके रिश्तेदार, समर्थकों एवं अफसरों की पूरी मण्डली शामिल है। पुलिस प्रशासन या तो मिले हुए है या तो मूक दर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही बीसीसीएल के विभिन्न कोलियरी क्षेत्रों के कुछ कोयला अधिकारियों की संलप्तिता की भी बात इस रिपोर्ट में कही गयी है।

धनबाद में धड़ल्ले से चल रहे इस अवैध कारोबार में अनुमानतः जिले के विभिन्न हिस्सों से प्रतिदिन तकरीबन 10 करोड़ रुपये का अवैध व्यापार हो रहा है। झरिया, केंदुआ, बाघमारा से लेकर बरवाअड्डा, गोविंदपुर और निरसा तक यह अवैध व्यापार फैला हुआ है। बीसीसीएल के बाघमारा कोयलांचल में सबसे अधिक मात्रा में कोयले की लूट हो रही है। जबकि गजलीटांड़, मुराईडीह, सोनारडीह, तेतुलमारी, शताब्दी परियोजना क्षेत्र समेत आस-पास के कई इलाकों में डंके की चोट पर यह लूट मची हुई है। दिलचस्प बात यह कि इन क्षेत्रों से प्रतिदिन वैद्ध्य कागजातों के साथ लगभग 50 से 60 हाइवा कोयला लोड कर निकलती तो है लेकिन निर्धारित गंतव्य के बजाय सीधा दुगड़ा (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल) में जाकर अनलोड होती है। फिर वाहन चालाक वहां से नगद पैसे लेकर अपने आकाओं को थमाते हैं।  इसके बाद वे वाहन चालाक उसी वैद्ध्य कागजातों पर पुन: कोलियरियों के उन्हीं लोडिंग प्वाइंट पर जाकर फिर से कोयला लोड कराती है और निर्धारित गंतव्य पर अनलोड करती हैं। इसका मतलब साफ़ है कि एक ही कागजात पर एक ही वाहन दो बार कोयला लोड कर रही है और उतना ही अवैध मुनाफा कमा रही है।

पिछले दो वर्षों से बरवाअड्डा थाना क्षेत्र इस अवैध धंधा का सबसे बड़ा अड्डा बन हुआ है। लोहार बरवा के एक हार्डकोक भट्ठा में रात के अंधेरे में जम कर कोयला की हेराफेरी का खेल हो रहा है. इसमें एक भाजपा नेता के परिजन मुख्य रूप से शामिल हैं। स्थानीय ग्रामीणों के पुलिस को बार-बार सूचत करने के बावजूद इस सम्बंध में वे कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। जबकि कुसुंडा, तेतुलमारी, गोधर, गोंदूडीह, कतरास स्थित बीसीसीएल के विभन्न खनन परियोजनाओं के अलावे सिजुआ शक्ति चौक, भूली बस्ती, गोंदूडीह के धौड़ों से चोरी का कोयला 1000 से अधिक साइकिलों के साथ-साथ 407, टेम्पो, मोटरसाइकिल, स्कूटर के माध्यमों से लाकर एक स्थान पर जमा की जाती है, फिर रात के अंधेरों में ट्रकों के माध्यम से मंडियों तक पहुंचायी जाती है। हर क्षेत्र की पुलिस यह पूरा माजरा देखती है परन्तु कोई कार्यवाई नहीं करती। वहां के बुजुर्ग जानकारों का कहना है कि वे ऐसी कोयला चोरी अपने जीवन काल में कभी नहीं देखे हैं। क्या ऐसी लूट बिना सत्ता के दुरुपयोग किए संभव हो सकती है?

अब सवाल यह है कि इतना बड़ा गोरखधंधा धनबाद जिले में डंके की चोट पर चल रहा हो और सत्ता पक्ष शामिल न हो यह संभव नहीं प्रतीत होता है। कई सवाल और हैं जो सरकार को कटघरे में खड़ा करती है जैसे एमपीएल का कोयला भट्ठों में पहुंचाने का मामला ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया गया? इस गोरखधंधे में शामिल बड़ी मछलियों के खिलाफ पुलिस क्यों कार्रवाई नहीं कर रही है? मालूम हो कि 25 मई 2017 की रात में तत्कालीन सिटी एसपी अंशुमान कुमार व ग्रामीण एसपी एचपी जनार्दनन के नेतृत्व में छापामारी में कोयले में काले धंधे का खुलासा हुआ था, परन्तु इसपर भी कोई कार्यवाई आगे नहीं बढ़ी क्योकि इस बहुचर्चित अवैध कारोबार में एक बड़ा सिडिंकेट काम कर रहा था। इसमें कहीं दोराय नहीं है कि बिना इनके पीठ पर सत्ता पक्ष का हाथ हुए यह संभव ही नहीं हो सकता। ऐसे में ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ सिर्फ जुमला नही तो और क्या है? क्या प्रदेश में रघुवर सरकार इस जुमले के आड़ में जनता की परवाह किए बगैर संशाधन को लूटवाते हुए भष्मासुर नहीं बनी हुई है? और इनके ऐसे कुकर्मों को देखते हुए आसानी से यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि क्यों इनके शासन काल में स्वीस बैंक में रखे धन में बृद्धि हो रही ही है और घोटालो में घोटालों की गुणात्मक बृद्धि देखी जा रही है।

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