रघुवर दास ने ऐसा क्या किया कि पूरे राज्य में उनकी थू-थू होने लगी

Share on facebook
Share on telegram
Share on twitter
Share on whatsapp
morabadi times square

 

मोरहाबादी मैदान को न्यूयार्क के टाइम स्क्वायर की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है इसकी ठेकेदारी हाइटेक ऑडियो विजुअल कंपनी को दिया गया है, क्यों? कुछ उदाहरणों से इस समझने का प्रयास करते हैं

कुछ भी हो जाय पर बोलने का प्रयास लगातार जारी रखिये, डर लगे तो जोर की जगह धीरे बोलिए। नागरिकता के अभ्यास के लिए बोलना जरूरी है नहीं तो सत्ता के लिए आप सिर्फ नंबर मतलब (आधार नम्बर) बन कर रह जायेंगे। नागरिक जब नंबर में बदल जाता है तो वो सिर्फ जिन्दा लाश बन रह जाता है।

आईये आप को एक सच्ची घटना से रु-बरु कराता हूँ।  ये घटना झारखण्ड की है, ध्यान से देखिये इस तस्वीर में ईंटे बना रहे व्यक्ति को:

BRICKS MAKER
BRICKS MAKER

जानते हैं ये व्यक्ति सुबह कितने बजे उठता है? नहीं पता पर यह 9 बजे तक यहाँ काम करता है फिर 3 बजे के बाद फिर से इसी काम में जुट जाता है। ये पारा शिक्षक है इसलिए ये 9 बजे बच्चों को पढ़ाने जाता है। इनका काम भी सामान्य शिक्षक के बराबर है पर वेतन मात्र 7000 से 8000, और वो भी समय पर नहीं।

आन्दोलन भी किए, एक की मौत भी हुई। 30 हज़ार पारा शिक्षक 20 दिनों तक जेल में भी रहे, लाठी भी खाए यहाँ तक कि अपने खून से 2016 में मोदी जी के जन्म दिवस पर खून से लिख कर उन्हें अपनी समस्या से भी अवगत कराये पर सब ढाक के तीन पात ही साबित हुए। सरकार के पास इनको देने के लिए पैसे ही नहीं है।

झारखंड प्रदेश के मुख्यमंत्री रघुवर दास के राज में अबतक सिर्फ ढपोरशंखी वादों का ही सिरका पिलाया जा रहा है।

इस प्रदेश में लगातार भूख से मौतें रुकने का नाम नहीं ले रही है वही चंद दिनों पहले फिर एक महिला की जान भूख से चली गयी और रघु-तंत्र ऐसी समस्या को दुरुस्त करने के वजाय ये साबित करने में जुट गयी कि ये मौत भूख से नहीं बल्कि बीमारी से हुई है। अब भी इन को झारखण्ड राज्य की जगह खुद की चिंता ज्यादा है। मतलब साफ़ है कि राज्य के गरीबों के लिए भी इनके पास संवेदना और पैसे नहीं है।

राजधानी रांची के साथ-साथ पूरे झारखण्ड में पानी की समस्या से लोगों को निजात नहीं मिल रही है। आये दिन शहर के वार्डों के आलावा सुदूर ग्रामों में लगातार पानी को लेकर आंदोलन किये जा रहे हैं। बावजूद इसके सरकार की तरफ से कोई सार्थक पहल नहीं दिखा है। राज्य में खराब पड़े चापानल को दुरुस्त करने के लियें भी इनके पास पैसे नहीं है| लोग पानी के बिना त्राहि –त्राहि कर रहे हैं।

राज्य में स्वास्थ्य का ये आलम है कि झारखण्ड प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में जब तक दहाई संख्या में  मरीजों की मृत्यु नहीं हो जाती तब तक रघु राज के कानों में जूँ तक ना रेंगती है। और उन कातिल डॉक्टरों की मांगे मानने के लिए इनके पास राशि उपलब्ध हो जाती है। ये परस्थितियाँ इस सरकार की मनोदशा बयान करने का लिए प्रयाप्त हैं।

इस पूरे माजरे का खेल यह है कि जिस योजना में मलाई ! ज्यादा हो वैसे योजनायों को ये सरकार बड़ी ताम-झाम के साथ लागू करती है। उदाहरण के तौर पर पर्यावरण के दृष्टीकोण से रांची का मोरहाबादी मैदान शहर का मात्र एक ही खुला मैदान था उसे भी इस सरकार द्वारा आधुनिकरण के नाम पर विद्युत उपकरणों से पटने की तैयारी कर चुकी है और कह रहे हैं कि इसे न्यूयार्क के टाइम स्क्वायर की तर्ज पर विकसित किया जा रहा हैं।

इस मैदान को चारों तरफ से न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर तर्ज पर 10 गुणा 6 मीटर की 11 एलइडी स्क्रीनों से पटा जायेगा। वर्तमान स्टेज के पीछे दो एलइडी स्क्रीन लगने हैं और  दो एलइडी स्क्रीन बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम के ठीक ऊपर, स्टेज के विपरीत दिशा में भी लगना है। तीन स्क्रीन दाहिनी तरफ व चार स्क्रीन बायीं तरफ लगेंगे। इसके अलावा छह हजार वाट के 14 साउंड सिस्टम भी इनस्टॉल होने हैं। मैदान को चारों तरफ से स्थायी रंगीन लाइटों से सजाया जायेगा। मौजूद सारे पेड़ों को एक लाइन में किया जायेगा पर इस मुख्य काम का आरंभ 15 नवंबर के बाद शुरू किया जायेगा। आम दिनों में इस स्क्वायर से सरकार का ठेकेदारी के माध्यम से भाड़े वसूलने का भी प्रोग्राम है। कुल मिलकर कहा जा सकता है कि पर्यावरण का पूरी तरह से सत्यानाश!

राज्य के किसी भी जरूरी कार्यों के लिए इनके पास पैसे नहीं है परन्तु पर्यावरण का विनाश एवं सर्कस शो करने के लिए इनके खजाने में अथाह धन है। अब इस विषय पर आप ही विचार कीजिये पर…  

Leave a Replay

DON’T MISS OUT ON NEW POSTS

Don’t worry, we don’t spam. Click button for subscribe.