चौसर में फंसी भाजपा को बाबूलाल का आसरा

चौसर

हेमंत के चौसर में फंसी भाजपा को बाबूलाल का आसरा  नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन द्वारा 2019 के झारखंड चुनाव में बिछाई गयी महाभारत की चौसर केवल राजनीति भर नहीं है। पासे जिस तरह फेंके गए वह झारखंड में गाथा के तौर पर कई  दस्तावेज़ रच रही है। जिसमें एक तरफ भाजपा क्षित-विक्षित हो 180 डिग्री … Read more

अवाम क्यों अपनी समस्या को लेकर मुख्यमंत्री से गुहार लगाती दिखती है

अवाम

झारखंड की पिछली सत्ता अगर ढोल पीटते हुए कहे असंगठित क्षेत्र के अवाम के लिए एक नयी पेंशन योजना उसके केंद्री सत्ता ने पेश की है। और उसके आसरे यह दावा करे कि इससे असंगठित क्षेत्र के मज़दूर, जो बुढ़ापे में या असहाय होने के स्थिति में अपनी आजीविका का इन्तज़ाम नहीं कर सकते, को … Read more

बाबूलाल जी के बदले सुर के सियासी मायने

बाबूलाल मरांडी

अगर बाबूलाल मरांडी झारखंड चुनाव के वक़्त तक भाजपा घरानों के प्यादे होने के इलज़ाम को नकारते रहे। अगर बाबूलाल मरांडी चुनाव के वक़्त अपने विधायक को जिताने के जोर आज़माइश करते दिखे। अगर बाबूलाल मरांडी अपने विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के संदेह मात्र पर तत्काल निष्कासित दे। अगर बाबूलाल मरांडी अपने … Read more

केंद्रीय सत्ता के लिए आरक्षण के मायने नहीं तो कोयला-लोहा भी नहीं 

आरक्षण

केंद्रीय सत्ता सरकारी संस्थानों को बेच आरक्षण ख़त्म करना छाती है केंद्रीय सत्ता द्वारा जनता के कमाई पर खड़ी सरकारी संस्थाओं को बेचने के फैसले ने, देश के ग़रीब जनता व राज्यों के समक्ष आरक्षण को लेकर दसियो सवाल खडे कर दिये है। बुद्धिजिवियों का मानना है कि, संविधान की थ्योरी को बीजेपी पलटना चाहती … Read more

अवाम के हित में फैसले लेती हेमंत सत्ता

अवाम

अवाम के हित में लगार फैसले लेती हेमंत सत्ता ने झारखंड में नयी परंपरा का शुरुआत कर दी है अलग झारखंड के इतिहास में अधिकांश राज करने वाली सत्ता किसानों के मशीहा बनने का ढोंग रचती तो रही, लेकिन किसान अपने दुर्भाग्य पर रोते रहे। यकीनन झारखंड के बीते चुनाव में प्रमुख विपक्ष झामुमो ने … Read more

नक्सलवाद से लड़ाई लड़ रहे आदिवासियों को विश्विद्यालय क्यों नहीं मिला

विश्वविद्यालय

नक्सलवाद से लड़ाई लड़ रहे आदिवासियों को विश्विद्यालय क्यों महरूम रखा गया   मनुस्मृति को दरकिनार कर कौटिल्य अर्थशास्त्र की राह अपना चुकी केन्द्रीय सत्ता देश को उस मुहाने पर ला खड़ी की है, जहाँ वह देश चलाने के नाम पर अपनी ठाठशाही खर्चे के लिए, जनता की पसीने की कमाई पर खड़ी तमाम सरकारी … Read more