सामंतवाद के दौर में लोक नायकों को दो कदम पीछे आ बनानी ही पड़ती है रणनीत
झारखण्ड : जब लोकतंत्र में सामन्ती घुसपैंठ काफ़ी भीतर तक हो. संस्थानों में अधिकाँश कलम उसके हो, तो मुमकिन है कि जन हित मुद्दे अधर में लटक ही हैं. ऐसे में लोक नायकों को दो कदम आ नए सिरे से रणनीति बनानी ही पड़ती है. रांची : ऐसे दौर में जब लोकतंत्र में फ़ासी या … Read more