मोदी सत्ता में श्रम क़ानून में पूँजी परस्त बदलाव – ट्रेड यूनियनों के पास कारगर जवाब तक नहीं
देश में मज़दूरों के लिए दर्जनों श्रम क़ानून काग़ज़ों पर मौजूद हैं. पर तमाम कारख़ानों-खेतों खलिहानों में काम करने वाले श्रमिक समझते हैं कि इन क़ानूनों की वास्तविकता क्या है. मोदी सत्ता में देश के असंगठित-अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत मज़दूर आबादी तो वैसे भी इन तमाम क़ानूनों के दायरे में बिरले ही आती है. औपचारिक … Read more