सराबोर चैत-सखूआ-फूलों की खुसबू से मदमस्त फजा के बीच “सरहुल”

सराबोर चैत -सरहुल

रंगों से सराबोर चैत, सखूआ के फूलों की खुसबू से मदमस्त झारखंड की फजां के बीच “सरहुल” प्राकृतिक प्रेमी के पर्याय झारखंडियों के जीवन चक्र को पूरा करती है। इस पर्व के नाम मात्र से ही प्रकृति प्रेमी, नैसर्गिक गुणों के धनी, पर्यावरण के स्वभाविक रक्षक इन आदिवासियों का जीवन समर्थक हो उठता है। सखूआ … Read more

आदिवासी भाजपा के नजरों में जमींदार और कॉर्पोरेट जगत नवगरीब

आदिवासी

रघुवर सरकार आदिवासी को जमींदार और कॉर्पोरेट जगत को गरीब एवं भूमिहीन मानती है  देश में नयी आर्थिक नीतियों के लागू होते ही कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का अर्थ किस प्रकार परिवर्तित हुआ इसका जीवंत मिसाल झारखंड के रूप में देखा जा सकता है। यहाँ के लोक शब्दों में बयाँ करें तो मौजूदा सरकार यहाँ के … Read more