गाँधी तब भी मारे गए, अब भी मारे जाने वाले हैं

गाँधी

चेहरा जब चरखा चला अपना कद बापू बराबर मापने लगे तो उसे सत्य, अहिंसा व देश के गाँठ  के पर्याय के तौर पर भी साबित करना होगा। क्योंकि चरखा तो देश को खुद के इन्फ्रास्ट्रक्चर के पहचान तले गढ़ने का परिचायक है। वैचारिक मतभेदों के बाद भी इससे इनकार नहीं कि गांधी देश हैं। एक ऐसे … Read more

साहेब की धार्मिक सत्ता के बीते वर्षों में क्या हुआ भूले तो नहीं ?

साहेब की धार्मिक सत्ता

बीते वर्षों में साहेब की धार्मिक सत्ता में देश तीतर-बीतर हो गया  आज रामनवमी के अवसर पर आडम्बर से भरे रामभक्तों को देख कृष्णकाल की वृतांत याद आ जाती है, जब आज के प्रधान नेता के ही भांति उस वक़्त भी किसी को इतना घमंड हो गया था कि वह विष्णु का वेषभूषा धारण कर … Read more

आरक्षण से क्या लाभ होगा जब देश में नौकरियाँ ही नहीं बचेगी

आरक्षण

मोदी जी लगातार झूठी दाव चल रहे हैं। पहले झूठा दांव लगाया कि हर साल वे दो करोड़ नौकरियाँ पैदा करेंगे फिर चुनाव के बाद वह झूठ मक्कारी में बदल गई। मोदी जी ने बताया कि पकौड़ा तलना भी रोज़गार है और बेरोजगार युवाओं को नाले की गैस से चाय बनाने का बिजनेस समझा सरकारी … Read more