गाँधी तब भी मारे गए, अब भी मारे जाने वाले हैं
चेहरा जब चरखा चला अपना कद बापू बराबर मापने लगे तो उसे सत्य, अहिंसा व देश के गाँठ के पर्याय के तौर पर भी साबित करना होगा। क्योंकि चरखा तो देश को खुद के इन्फ्रास्ट्रक्चर के पहचान तले गढ़ने का परिचायक है। वैचारिक मतभेदों के बाद भी इससे इनकार नहीं कि गांधी देश हैं। एक ऐसे … Read more