झारखंडी 1941 [‘ओलचिकी’ लिपि के आविष्कार काल] से अपनी भाषा के लिए सजग
झारखण्ड क्षेत्र में सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक व आर्थिक दोहन के मद्देनजर असंतोष का घाव बहुत ( ‘ओलचिकी’ लिपि के आविष्कार काल ) पुराना है. बाहरियों के हित में संघीय ढांचा के अंतर्गत आने वाली तमाम अधिकारों का मौजूदा सरकार मान रख रही है. ऐसे में बाहरियों को केन्द्रीय दलों के उकसावे में न आते हुए झारखंडियों … Read more