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क्या सरना धर्मवाली ही आदिवासी हैं

आदिवासी क्या हिन्दू हैं और सरना धर्म जैसा कोई धर्म नहीं ?

भाजपा एवं उसके अनुषांगी दल के ऐसे कई उदाहरण हैं जिस आधार पर कहा जा सकता है कि ये  देश की राजनीति में हमेशा दोहरा खेल खेलते हैं। जैसे झारखंड में हिन्दू-मुसलमान, जाति-पाति, 11 बनाम 13 जिले, बाहरी-भीतरी और अब आदिवासी भाई में फूट डलवाने या गुमराह करने के लिए सरना- क्रिस्चन के बीच ऐसा … Read more
कुरमी बहुल क्षेत्र

कुरमी बहुल क्षेत्र (सिल्ली ) में भी आखिर सुदेश महतो क्यों हारते हैं !

सुदेश की कुरमी बहुल क्षेत्र सिल्ली उपचुनाव में हार उनकी दोहरी नीति के कारण हुई  –पीसी महतो (चक्रधरपुर) की कलम से झारखण्ड में हुए इस वर्ष सिल्ली उपचुनाव में सुदेश महतो की हार के कई मायने हैं। इन दिनों सुदेश महतो की आजसू (पार्टी) झारखंड में भाजपा सरकार की सहयोगी दल है। हालांकि भाजपा की सरकार … Read more
दलित छात्र का अपमान

दलित छात्रों का अपमान क्यों नहीं खलता भाजपा नेताओं को ?

भारत देश आज असंख्य जातियों में विभाजित है और देश में जाति आधारित अनगिनत संगठन विद्यमान हैं। तकरीबन सभी जाति के पास अपने से नीचे देखने के लिए एक जाति है। इसी मनुवादी सोच में सबसे नीचे समझे जाने वाले दलितों के प्रति हिंसा हर वक़्त जारी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट की माने … Read more
झारखंडी आदिवासी-मूलवासी का विस्थापन

विस्थापन झारखंडी आदिवासी-मूलवासी का पर्याय !

दशक, 1990 के आरम्भ से झारखण्ड राज्य (2001 के पूर्व बिहार) के नीतिगत ढाँचे में आये नवउदारवादी बदलाव के बाद से राज्य में प्रायोजित हिंसा बढ़ने से देश की अधिकांश आदिवासी-मूलवासी आबादी भीषण ग़रीबी के प्रभाव में रसातलिय जीवन जीने को अभिशप्त हैं। आदिवासियों-मूलवासियों की जल, जंगल, जमीन, नदियों, चरागाह, गाँव के तालाब और साझा … Read more

उधड़ी हुई सी है झारखंडी बुनकरों की जिंदगी

आरोप लगाया कि सरकार बुनकर दिवस के दिन करोड़ों की राशि खर्च कर सिर्फ दिखावा कर रही है। यह ना तो बुनकरों के हित में है और ना ही इससे झारक्राफ्ट को किसी प्रकार का फायदा पहुँचने वाला है। यह केवल एक छलावा है।
Jharkhand forest

अबतक वनक्षेत्र के 50,000 हेक्टेयर भूमि लूटा चुकी है यह सरकार

इनके कथन आज भी कितने प्रासंगिक हैं, हम झारखंडी एक तरफ हिन्दू-मुसलमान में उलझे रहें और दूसरी तरफ हमारे जंगलों से लगभग 50 हजार हेक्टेयर भूमि को उड़ा लिया गया। और हमारे मुख्यमंत्री जो कि खुद वन मंत्री हैं, को इसका पता भी न चल सका। कैसे इस सेवक पर विश्वास किया जाय?