हेमन्त सरकार में जनजातीय भाषाओं के विकास के खुले द्वार, संविधान में शामिल कराने की मांग सहित पहली बार रोज़गार और पढ़ाई में मिला स्थान

जनजातीय भाषाओं के विकास के खुले द्वार

झारखण्ड में मुख्यमंत्री के प्रयास से पहली बार हुआ संभव – जहाँ जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई करने से बड़े पैमाने पर मिल सकेगा रोजगार  सरकारी स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर संथाली, हो, मुंडारी, कुड़ुख, करमाली और खोरठा भाषाओं को किया गया अनिवार्य रांची : जनजातीय बहुल झारखंड की अपनी एक अलग पहचान है. यहां पर … Read more