स्टेन स्वामी के विचारों को मरने नहीं देंगे

वंचितों को ध्यान में रखकर बन रही है योजनाएं, स्टेन स्वामी के विचारों को मरने नहीं देंगे – मुख्यमंत्री

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फादर स्टेन स्वामी की स्मृति सभा में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा – फादर के विचारों को मरने न दें. हमारी सरकार में दलित, वंचितों और आदिवासियों को ध्यान में रखकर योजनाएं बन रही हैं

आज़ादी के संघर्ष व आंदोलनों ने देश को ज़िम्मेदारी दी कि भारत से गरीबी की लकीर मिटाएं. सबको मूल भूत सुविधाओं के साथ जीने का अधिकार मिले. लेकिन, मौजूदा दौर में बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे खड़ी है. वह देश की विस्थापित आबादी है जो गांव से शहर और महानगर पहुँच किसी प्रकार जीवन जीने को मजबूर है. लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि चुनी हुई मौजूदा केन्द्रीय सत्ता ने, नोटबंदी से लेकर कोविड प्रबंधन तक में, इनकी परवाह ही नहीं की. या फिर इस वंचित वर्ग की परवाह करना छोड़ दिया. 

इस वंचित आबादी की सामाजिक नापजोख करें तो बड़ी तादाद में दलित, आदिवासी व अल्पसंख्यक का सच सामने आएगा. न केवल जिनके अधिकार हमेशा छीने जाते रहे, उत्पीड़न भी जारी रहा है. भारतीय जेलों में भी इसी वर्ग के लोग भरे हैं. हिरासत में मारे जाते हैं, मामूली आरोपों में बरसों विचाराधीन क़ैदी बन मुकदमें खत्म होने की आस में बूढ़े हो जाते हैं. इसी वंचित और हाशिए पर पड़े समुदाय को हैसियत बताने के लिए फादर स्टैन स्वामी जैसे समाजसेवियों की बलि, उस सत्ता द्वारा दिया गया है. जिसके अक्स में संसद में रो पड़ने वाले प्रधानमंत्री के कानों तक एक वृद्ध की पीड़ा नहीं पहुँचती.

15 जुलाई 2021, झारखंड, नामकुम बगईचा में फादर स्टेन स्वामी की स्मृति में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन हुए उपस्थित 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने फादर स्टेन स्वामी की स्मृति में पौधारोपण कर उन्हें नमन किया

15 जुलाई 2021, इन्हीं गंभीर सवालों के बीच झारखंड, नामकुम बगईचा में फादर स्टेन स्वामी की स्मृति में सभा आयोजित की हुई. स्मृति सभा में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन भी उपस्थित हुए. उन्होंने उनकी स्मृति में पौधारोपण कर उन्हें नमन किया. 

योजनाएं दलित, वंचितों और आदिवासियों को ध्यान में रखकर बन रहीं हैं

फादर स्टेन स्वामी के विचारों को मरने न दें

हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड

फादर के सम्मान में मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने कहा कि शहादत देने के इतिहास में झारखण्ड कभी पीछे नहीं रहा है. भगवान बिरसा मुंडा से लेकर फादर स्टेन स्वामी तक के जीवन को राज्यवासियों ने देखा है. आनेवाली पीढ़ी को भी यह जानना चाहिये कि फादर स्टेन स्वामी दलित, वंचित, आदिवासी समाज के अधिकारों की अभिव्यक्ति के रूप में सदैव जाने जाते रहे. मुख्यमंत्री ने सुखद दिनों को याद करते हुए बताया कि उनकी मुलाक़ात फादर स्टेन स्वामी से व्यक्तिगत रूप से हुई थी. तब उन्हें पता नहीं था कि वे अपने जीवन काल में अमिट लकीर खींचते आ रहें हैं. अब उसका एहसास हुआ है. 

… वे असाधारण व्यक्तित्व थे, उनका जीवन आसान नहीं था. जीवनभर वह हाशिये पर खड़े लोगों को रास्ता दिखाते रहे. युगों में ऐसे लोग आते हैं, जिनके द्वारा किये गए कार्य अमिट छाप छोड़ जाता है. जीवन है, तो मृत्यु भी है, लेकिन फादर का जीवन सिखाता है कि इस जीवनकाल से हमें सकारात्मक कार्य कर विदा लेना चाहिए. फादर स्टेन स्वामी के विचारों को मरने न दें.

दलित, वंचित और आदिवासियों के प्रति संवेदनशील सरकार 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भौतिकवादी युग में दलित, वंचित और आदिवासी समाज की विकास की रफ्तार कम है. इसे बढ़ाने की जरूरत है. मैं अकेले यह कार्य नहीं कर सकता. इसके लिए सभी को व्यक्तिगत रूप से प्रयास करना होगा. हालांकि सरकार किसी भी योजना को दलित, वंचित और आदिवासियों की सहभागिता को ध्यान में ही रखकर धरातल पर उतारती है. सरकार इनकी जरुरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दे रही है.

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