टाना भगतों

वर्षों ठगे गए टाना भगतों के माँगों को अंजाम तक पहुँचाया झारखंडी पुत्र हेमंत ने

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टाना भगतों की मांग कोई नहीं है, 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा करने वाली रघुवर सत्ता ने इन्हें किया था नज़रअंदाज़

राँची : झारखंड के टाना भगत किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। यह समुदाय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसात्मक नीतियों से प्रभावित होकर आज़ादी की लड़ाई लड़ी है। और आज भी वे महात्मा गांधी के अहिंसा मार्ग पर न केवल चलते हैं, प्रसार भी करते हैं। लेकिन, विडंबना देखिये आज़ादी के बाद इन आज़ादी के सिपाहियों की जायज़ माँगे सभी सरकारों के आगे दम तोड़ती रही।

टाना भगत समय-समय पर अपने मांगों को लेकर आंदोलन करते रहे है। राज्य गठन के 20 साल पूरे होने को है। जिसमे 18 वर्ष प्रत्यक्ष-आप्रतयक्ष रूप में बीजेपी का शासन रहा। जाहिर है यदि आज भी वे आन्दोलनरत हैं तो इन आज़ादी के सिपाहियों को इतने वर्षों तक केवल धोखा ही मिला है।

इसी धोखे से नाराज़ होकर ये सभी 2 सितंबर को अहिंसात्कम तरीके से अपनी मांगों को लेकर लातेहार के टोरी रेलवे ट्रैक पर जम गए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जब इसकी जानकारी हुई तो वे उनसे प्रत्यक्ष तौर पर मिले। हेमंत ने उनकी माँगे उनके ही ज़बानी सुनी। और आश्वासन दिया है कि विधानसभा सत्र के बाद सरकार उनकी मांगो को पूरा करेगी।

टाना भगतों

इस सम्बन्ध में पत्रकारों से टाना भगतों की हुई बातचीत में पता चला कि उनका मानना है – हेमंत एक आंदोलनकारी के पुत्र हैं। इसलिए उनकी मांग वही पूरा कर सकते है। 

तीन माह में ही रघुवर ने तोड़ दिया टाना भगतों से किया वादा

जुलाई 2018 में रघुवर दास की वार्ता टाना भगत के एक प्रतिनिधिमंडल से हुई थी। जिसमे मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इनके लंबित मांगो को पूरा करने का वादा भी किया। वार्ता में मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि जमीन के बदले उनसे किसी प्रकार का लगान नहीं लिया जाएगा। और खतियान भी उनके ही नाम से रहेंगे। लेकिन रघुवर दास द्वारा किया वादा केवल तीन माह में ही दम तोड़ दिया।

परेशान टाना भगत समुदाय फिर से आंदोलन को विवश हो गये। 27 नवंबर 2018, सीएम से प्रत्यक्ष मिलने की मांग को लेकर यह समुदाय सपरिवार, कडाके की टंड में पूरी रात सचिवालय (प्रोजेक्ट भवन) के सामने, खुले आकाश के नीचे धरना पर बैठे रहे। इनमें महिलाएं समेत कई बच्चे बीमार भी हुए। लेकिन, रघुवर दास ने इनसे मिलने में पूरे 24 घंटे का वक़्त लगा दिया। इस बार भी रघवर ने टाना भगत समुदाय से कोई लगान नहीं लेने का वादा कर तोड़ दिया।

आरोप लगाने से पहले प्रदेश भाजपा को अपनी रघुवर सरकार के नीतियों व गिरेबा को झाकना चाहिए।

कबीर दास की उलटी वाणी बरसे कम्बल भीगे पानी को चरितार्थ करती भाजपा 

हेमंत सरकार को सत्ता में आये अभी केवल करीब 8 माह ही हुए हैं। जिसमे, 5 माह से यह सरकार कोरोना संक्रमण के खतरे से जूझती रही है। इन्हीं हालातों के बीच टाना भगत समुदाय अपनी माँगों को लेकर आंदोलन को विवश हुए। विडंबना देखिये, अपने 6 वर्षों के कारिस्तानियों को Act of God का नाम देने वाली भाजपा इन आज़ादी के सिपाहियों के प्रति विधवा विलाप कर रही हैं। वाह री संघी राजनीति – “कबीर दास की उलटी वाणी बरसे कम्बल भीगे पानी

हेमंत सरकार पर टाना भगतों की अनदेखी करने का आरोप लगाने वाली भाजपा यह तो बताये कि उनकी डबल इंजन की सरकार का क्या कोयला या तेल ख़त्म हो गया?  जो पांच साल के कार्यकाल में वादा कर के भी वह उनकी मांगों को पूरा नहीं कर सकी। जाहिर है डबल इंजन की सरकार की मंशा टाना भगतों के मांगों को ख़ारिज करना था। कडवी सच यही है कि उस सरकार ने न तो टाना भगतों के रोज़गार के लिए कोई कदम उठाई और न ही झारखंड के इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए कोई विशेष कार्यक्रम चलाई। 

हेमंत के आश्वासन से टाना भगतों ने अपने आंदोलन को विराम दिया 

टाना भगतों

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आश्वासन के बाद राष्ट्रपिता के मतवाले टाना भगतों ने अपने 55 घंटे के आंदोलन को विराम दे दिया है। उन्होंने हेमंत सोरेन से बात करने के बाद पत्रकारों से कहा कि उनका मानना है कि हेमंत एक आन्दोलनकारी के पुत्र हैं। वह उनके जायज माँगों को अवश्य अंजाम तक पहुंचाएंगे।

सीएम ने इस सम्बन्ध में कहा कि उन्होंने उन्हें विश्वास दिलाया है कि उनकी सरकार अपने राज्य के इस ऐतिहासिक धरोहर का मान ज़रुर रखेगी। टाना भगतों का सर्वांगीण विकास करना सरकार की प्राथमिकता है। पिछली सरकारों ने जो भी गलतियां की हो, लेकिन अब हमारी साकार में उनके हक और अधिकारों के साथ कोई सेंधमारी नहीं कर सकेगा।

मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद उन्हें मिले आश्वासन –

  • राज्य के खनिज उत्खनन में अधिग्रहित जमीन के बदले टाना भगत रैयतों की मुआवजा और नौकरी सुनिश्चित होगी।
  • पशुधन योजना की शुरुआत कर टाना भगत समुदाय को उससे जोड़ा जायेगा।
  • टाना भगत समुदाय को उनके जमीन के पट्टे दिए जायेंगे।
  • उनकी लगान माफ़ होगी। 
  • सीएनटी एक्ट को सख्ती से लागू कर उनके अधिकारों को संरक्षण दिया जाएगा। 
  • उनके बच्चों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था की जायेगी। साथ ही रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय से पास करने वाले टाना भगत समुदाय के बच्चों को रोज़गार से जोड़ा जायेगा। 
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