SONBHADRA: पंचायती राज दिवस पर प्रधानमंत्री का यूपी के प्रधान से चर्चा क्यों ?

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पंचायती राज दिवस पर यूपी sonbhadra के प्रधान से चर्चा

पंचायती राज दिवस के अवसर पर बंदी में बेहतर कार्य करने के लिए झारखण्ड जैसे राज्यों को छोड़ प्रधानमंत्री यूपी के प्रधान से चर्चा क्यों करना चाहते हैं?

पंचायती राज दिवस पर यूपी sonbhadra के प्रधान से चर्चा
पंचायती राज दिवस पर प्रधानमंत्री यूपी sonbhadra के प्रधान से चर्चा कर सकती है

SONBHADRA : पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री देशव्यापी बंदी के दौरान बेहतर कार्य के लिए दो ग्राम प्रधान से बात करेंगे। इसके लिए यूपी के सोनभद्र के दो प्रधानो का नाम सबसे उपर माना जा रहा है। जिससे सूत्र बताते हैं कि इन्हीं दो प्रधानमंत्री बात कर सकते हैं।  

ज्ञात हो कि देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 23,000 के पार पहुँच चुकी है। जबकि पिछले 24 घंटे में 37 लोगों की मौत व 1,684 नए मामले सामने आए हैं। और देश भर में उत्तरप्रदेश का पायदान 1500 मामले व 24 मौतों के साथ 5 पर है।  

प्रधानमंत्री इसी राज्य से निर्वाचित सांसद हैं। अभी कुछ दिनों पहले कोटा से छात्रों को यूपी लाए जाने के लिए केंद्र पर कई राज्यों ने पक्षपात के आरोप लगाए थे। फिर से एक बार उत्तरप्रदेश के SONBHADRA को पंचायती राज दिवस के मौके पर चुनना मुद्दा हो सकता है।

झारखंड जैसे राज्यों से ग्राम प्रधान को SONBHADRA के जगह पंचायती राज दिवस के उपलक्ष पर क्यों चुना जाना चाहिए?   

झारखण्ड अल्प संसाधन वाला राज्य हैं। कथित तौर पर, यहाँ अब तक किसी के मौत की संस्थानिक पुष्टि नहीं हुई हैं। नयी सरकार जिसका अभी तक गठन भी ठीक से हो पाया है। जिसे केंद्र भी उपेक्षित कर रहा है। यहाँ तक कि केंद्र द्वारा अब तक बकाया भुगतान भी नहीं किया गया है।

फिर इस प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हार न मानते हुए राज्य से लेकर प्रवासी जनता तक के लिए कई योजनायें चलायी। प्रदेश के विधायक व ग्राम प्रधानों ने आगे बढ़ कर सरकार के निर्देशानुसार जनता की मदद को एक चुनौती के रूप में लिया। उन्हें मौका नहीं दिया जाता है तो नाइंसाफी होगी।      

इस राज्य में गरीबों का भूख मिटाने के लिए पुलिस कम्यूनिटी किचन, दाल-भात योजना व मुख्यमंत्री दीदी किचन जैसे कई योजनायें चलाई जा रही है। यहाँ के लोगों को सरकार ने न केवल अग्रिम राशन व राशि दिया गया, बल्कि वैसों को भी राशन दिया गया जिसके पास राशन कार्ड नहीं है या फिर पिछली भाजपा सरकार ने रद्द कर दिए थे।

झारखण्ड के ग्राम प्रधान निसहायों को दे रहें 10 किलो राशन

राज्य के ग्राम प्रधान व वार्ड पार्षद निसहायों को 10 किलो राशन पहुंचाते हैं। साथ ही घूम-घूम कर दूसरे प्रदेश के प्रवासियों को भी खाना पहुंचा रहे हैं। इसलिए, अन्य राज्य की भांति यहाँ रह रहे एक भी प्रवासी ने यह नहीं कहा कि उसे खाना नहीं मिला। यह देश के साम्प्रदायिकता के लिए अच्छी खबर भी हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने भी न केवल कहा बल्कि प्रत्यक्ष तौर पर जात-पात की राजनीति से ऊपर उठकर जनता की सेवा कर रहे हैं।  सभी को एक सामान दृष्टि से खाना व स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवा रहे हैं। और लॉक डाउन में राज्य पर मंदी का असर न पड़े इसके लिए घरेलू उद्योग को अमलीजामा पहनाने पर जोर दे रहे हैं।

बहरहाल, झारखंड जैसे राज्यों की जगह यूपी के SONBHADRA के प्रधानों को चुन कर केंद्र सवालों से भागती दिख रही है। ऐसा इसलिए है, यदि केंद्र सरकार झारखंड जैसे राज्य से प्रधान को चुनती है तो न केवल उसकी पोल खुल जायेगी। बल्कि उसे कई चिकौटी काटते सवालों के जवाब भी देने पड़ेंगे। 

वह यह कतई नहीं चाहती। शायद भाजपा शासित राज्य के प्रधानो का चुनने का यही कारण हो सकता है। साथ ही आगे चल कर SONBHADRA का उदाहरण देकर अपने प्रचार तंत्र के माध्यम से यह भी साबित कर पाएगी कि भाजपा का शासन संकट के दौर में सभी से बेहतर रहा।

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