रघुवर

सहायक पुलिस कर्मियों से मिलने पहुंचे रघुवर दास -मंच से उन्हें बताना चाहिए कि पारा शिक्षकों व आंगनबाड़ी सेविकाओं के पिटाई के वक़्त कहाँ थी यह हमदर्दी

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हमदर्दी दिखाते वक़्त रघुवर दास शायद भूल गये कि सहायक पुलिस कर्मियों की वर्तमान स्थिति के जिम्मेदार केवल वह और उनकी सरकार है 

पूर्व मुख्यमंत्री शायद यह भी भूल चुके हैं कि सहायक पुलिस कर्मियों की नियुक्ति उन्होंने नक्सल ख़ात्मे के लिए किया था, लेकिन करवाया उनसे ट्रैफिक का काम 

राँची। झारखंड की राजधानी राँची, मोरहाबादी मैदान में रघुवर सरकार के गलत नीतियों का दंश झेल रही सहायक पुलिसकर्मी आंदोलनरत हैं। इसी दौरान एक ग़जब वाकया हुआ, हमदर्दी जताने व वर्तमान हेमंत सरकार के प्रति विरोध का स्वर खड़ा करने के प्रयास से बुधवार को सहायक पुलिस कर्मियों के बीच पूर्व तानाशाह मुख्यमंत्री रघुवर दास पहुंचे। 

रघुवर सरकारके गलत नीतियों के कारण खुले आसमान में सोते सहायक पुलिस कर्मी

साहेब का बयान था कि नक्सल क्षेत्र के युवाओं को गुमराह होने से बचाने के लिए ही उनकी सरकार ने अनुबंध पर सहायक पुलिस कर्मियों को नौकरी दी थी। लेकिन, हेमंत सरकार इनके साथ अमानवीय व्यवहार कर रही है। रघुवर दास का हेमंत सरकार पर आरोप है कि चार दिनों से इन आंदोलनकारियों से मिलने कोई मंत्री नहीं पहुंचा है। जो कि एक सफ़ेद झूठ है और शायद इसे ही भ्रम फैलाने वाली राजनीति एक जीता जागता उदाहरण कहा जा सकता है। और संघी राजनीति भी!

अब महत्वपूर्ण सवाल जनता के बीच यह है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री में तनीक मात्र भी राजनीतिक शर्मो हया शेष बची है या उसकी भी तिलांजी दे चुके है। अगर बची होती तो उन्हें ऐसी बयानबाज़ी के गंभीर मायने का अवश्य अनुमान होता। रघुवर दास जब कहते है कि वर्तमान सरकार गलत है। तो इसका सीधा मातब है कि उनके द्वारा खुद की तानाशाही सत्ताकाल का समीक्षा नहीं किया गया है। अगर करते उन्हें ज्ञात होता कि सहायक पुलिस कर्मियों के वर्तमान स्थिति के ज़िमेदार वह और भाजपा की डबल इंजन सरकार ही है। 

रघुवर सरकार में आंदोलनरत पारा शिक्षकों की उनकी पुलिस द्वारा ढाए गए जुल्म

मसलन,  झारखंडी जनता के अवाकी भरे सवाल यह हो सकते हैं कि उनकी यह हमदर्दी पारा शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और जल सहियाओं के वक़्त कहाँ थी? सत्ता के नशे में चूर इस शख्स ने उस वक़्त उनके आन्दोलन को पुलिसिया दामन से इस कदर रौंद दिया था कि उसकी छाप झारखंडियो के दिमाग में अमिट है। उसके गवाह आज भी झारखंड के जेलों में मिल जायेंगे।  

रघुवर काल में अपनी माँगों को लेकर खुली आसमान में सोती आंगनबाड़ी सेविकाएं

वाह री संघी राजनीति… मरहूम राहत इन्दौरी का मशहूर शेर इस वातावरण में सटीकता से बैठता है 

अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए

कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए

रघुवर सरकार में इनकी भर्ती हुई थी नक्सल ख़ात्मे के लिए, काम लिया ट्रैफिक पुलिस का

साल 2017, राज्य की पिछली भाजपा की डबल इंजन सरकार में नक्सलियों के ख़ात्मे के उद्देश्य से 10 हजार मानदेय पर कुल 2350 सहायक पुलिसकर्मियों की संविदा पर नियुक्ति हुई। तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे रघुवर दास द्वारा दावे किए गए कि राज्य के 12 अति नक्सल प्रभावित जिलों में नक्सल की ख़ात्मे के लिए इनकी तैनाती होगी। रघुवर दास द्वारा बुधवार को मोरहाबादी में दावा किया गया कि नक्सलवाद पर काबू पाने में इनकी भूमिका अहम रही है। लेकिन, जानकर कर आश्चर्य होगा कि रघुवर सरकार में अधिकांश सहायक पुलिसकर्मियों से ट्रैफिक पुलिस का काम लिया गया। 

भाजपा व रघुवर दास को इतनी ही चिंता थी, तो सहायक पुलिस कर्मियों की परमानेंट नियुक्ति क्यों नहीं किया ?सेवा शर्तों में सुधार व एकरूपता के लिए हेमंत सरकार द्वारा बनायी कमीटी के रिपोर्ट आने तक सहायक पुलिस कर्मियों को धीरज रखना चाहिए। 

रघुवर दास का सहायक पुलिसकर्मियों के प्रति हमदर्दी जताना साफ़ दर्शाता है उनका यह पैंतरा राजनैतिक सत्ता के मोह वश मगरमच्छ के आँसू के अतिरिक्त और कुछ नहीं हो सकता है। अगर उन्हें इनकी इतनी ही चिंता थी, तो क्यों नहीं उन्होंने अपनी सरकार में इनकी परमानेंट नियुक्ति की। दरअसल, भ्रष्टाचार में आकंठ तक डूबी बीजेपी की तानाशाह सत्ता की मंशा थी कि राज्य के लाखों आदिवासी-मूलवासी युवाओं को अंधेरे में रख कम वेतन में काम लिया जाए। और फूट की राजनीति का राज्य में बीज बोया जाए। बाबूलाल जी इसे भली भांति समझते हैं तब वह भी विपक्षी थे।

बहरहाल, सहायक पुलिस कर्मियों को इस संकट काल में, हेमंत सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में कार्यरत अनुबंधकर्मियों को नियमित करने और उनकी सेवा शर्तों में सुधार व एकरूपता के मद्देनज़र गठित कमेटी के रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। तब शायद वर्तमान सरकार इनकी समस्या के निदान के लिए कल्याणकारी नीतियों के साथ मजबूती से उपस्थित हों। सहायक पुलिस कर्मियों द्वारा धीरज का परिचय नहीं देने के स्थिति में माना जा सकता है कि वह भ्रम में है और वे राज्य में अनजाने अशांति का बीज बो रहे हैं। 

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