रघुवर काल में भीड़ जुटाने वाली समूह, सँवार रही हेमंत काल में महिलाओं का जीवन

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समूह

रघुवर काल में भीड़ जुटाने वाली मशीन (समूह), हेमंत सरकार में आगे बढ़ सँवार रही है ग्रामीण गरीब महिलाओं का जीवन स्तर

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चक्रीय निधि के रूप में राज्य के सखी मंडल को 75 करोड़ रुपये की राशि ऑनलाइन हस्तांतरित की। अनुदान के रूप में दी गई यह राशि 50 हजार सखी मंडलों को संकट के समय में राहत देगी। यह भी माना जाता है कि इस राशि से सखी मंडल और उनसे जुड़े 6 लाख ग्रामीण परिवार लाभान्वित होंगे।

रघुवर सरकार में, यह समूह चुनावी रैलियों में भीड़-इकट्ठा करने वाली मशीन थी।

सखी मंडल झारखंड का पारस्परिक सहायता समूह है, जिसका उद्देश्य सरकार की देखरेख में विभिन्न माध्यमों से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सशक्त बनाना है। हालांकि, पिछली रघुवर सरकार में, यह समर्थन समूह चुनावी रैलियों में भीड़-इकट्ठा करने वाली मशीन के रूप में जानी जाती थी।

लेकिन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शासन में इस समूह ने अपना एक अलग रूप दिखाया है। लॉकडाउन में, दीदी किचन के तहत, इसने राज्य के गरीबों को भूखे रहने से बचाया है। और राज्य की विश्वसनीयता को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री श्री सोरेन का कहाना है – ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता, सशक्तीकरण और आजीविका से जोड़ना सरकार की विशेष प्राथमिकता है। राष्ट्रीय ग्रामीण और आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सखी मंडलों जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे उनकी आजीविका, स्वरोजगार और कुशल व्यावसायिक अवसरों के साधन प्रदान कर उनके गरीबी उन्मूलन के प्रयास किए जा रहे हैं।

मसलन, आजीविका मिशन के तहत, झारखंड में कौशल विकास प्रशिक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इस मिशन के तहत झारखंड में 2 लाख 45 हजार सखी मंडलों के माध्यम से अब तक लगभग 30 लाख परिवारों को जोड़ा गया है।

इस कड़ी में 174 करोड़ रुपये एक लाख 16 हजार सखी मंडल को चक्रीय निधि के रूप में और 215 करोड़ रुपये 43 हजार सखी मंडल को सामुदायिक निवेश निधि के रूप में उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा 1 लाख 17 हजार सखी मंडलों को बैंकों से जोड़कर 1649 करोड़ रुपये झारखंड सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं।

जाहिर है सरकार बदलते ही कैसे संस्थाओं कि उपयोगिता व उनकी कार्यशैली बदल जाती है. इसका उदाहरण सखी मंडल के प्रकरण में आसानी से समझा जा सकता है.

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