राज्य में नियुक्ति प्रक्रिया को गंभीरता से आगे बढ़ाने लगी हेमन्त सरकार

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नियुक्ति प्रक्रिया

मुख्यमंत्री व ग्रामीण विकास मंत्री ने विभागों में रिक्त पदों पर नियुक्ति तथा प्रोन्नति में आ रही अड़चनों को यथाशीघ्र दूर करने के दिए निर्देश 

रांची : झारखण्ड सरकार ने 2021 को नियुक्ति का वर्ष घोषित किया है. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में सरकार का जनता के प्रति जवाबदेह होने की, गंभीर छवि बनी है. लोगों को भरोसा हो चला है कि सरकार जो कहती है उसे पूरा करती है. राज्य में करीब 5.25 लाख पद सृजित है. मुख्यमंत्री व ग्रामीण विकास मंत्री  ने राज्य के वरीय अधिकारियों तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को निर्देश दिया है कि एक माह में बाधाओं को दूर कर, सभी खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करें. मुख्यमंत्री की यह एक बड़ी पहल है और जल्दी ही राज्य में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होते हुए देखा जा सकता है. 

प्रोन्नति में आ रही अड़चनों को जल्द दूर करें…हेमन्त सोरेन

राज्यकर्मियों की प्रोन्नति में आ रही अड़चनों को जल्द दूर करने के लिए भी मुख्यमंत्री श्री सोरेन और ग्रामीण विकास मंत्री ने मुख्य सचिव, प्रधान सचिव कार्मिक, प्रशासनिक, राजभाषा विभाग श्रीमती एवं महाधिवक्ता के साथ बैठक की. मुख्यमंत्री ने राज्यकर्मियों की प्रोन्नति में आ रही अड़चनों को दूर करते हुए एक माह के अंदर नई नियमावली बनाने का निर्देश दिया है. इसके लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन होना है. समिति एससी/एसटी के प्रतिनिधित्व का अध्ययन कर अपना प्रतिवेदन देगी, जिसके आधार पर नई नियमावली का निर्माण होगा.

एक-डेढ़ साल पहले से ही झारखंड सरकार ने रोजगार देने की कर दी है शुरूआत

पिछले एक-डेढ़ साल से सरकार ने रोजगार देने की शुरूआत भी कर दी है. खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति व नर्सों की नियुक्ति इस फेहरिस्त में प्रमुखता से शामिल है. राज्य गठन के बाद पहली बार हेमन्त सरकार द्वारा ही जेपीएसएसी में मौजूद विसंगतियों को दूर करते हुए नियमावली बनाई गयी. जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में आ रही अड़चनों को दूर करने में सहायता मिलेगी. सरकार की कोशिश भी दिखी, जहाँ न सिर्फ सरकारी स्तर पर बल्कि निजी क्षेत्रों में भी स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले. साथ ही सरकार युवाओं को उद्यमशीलता से भी जोड़ने की कोशिश कर रही है ताकि युवा नौकरी मांगनेवाले नहीं देनेवाले बनें.

गौरतलब है कि 2020 से ही राज्य कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है. ऐसे में सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना था. इसके बावजूद सरकार ने धीमी गति से ही सही, लेकिन रोजगार से जुड़े मामलों की तरफ भी लगातार कदम बढ़ाती दिखी. रोजगार को लेकर राज्य के युवाओं द्वारा सोशल मीडिया में छेड़ी गयी मुहिम के मद्देनजर, सरकार ने माना है कि युवाओं की चिंता अपनी जगह पर जायज है. लेकिन, युवाओं को भी समझना होगी कि सरकार की प्राथमिकता में रोजगार प्रमुखता से शामिल है. व्यवस्था को दुरूस्त किया जा रहा है और शीघ्र ही रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी.

मोमेटम झारखंड युवाओं को नौकरी तो न दे पाई, लेकिन घोटाला का रूप जरुर ले लिया

बावजूद इसके, भाजपा राज्य में ऐसा माहौल बनाने का प्रयास कर रही है जिससे लगे कि सरकार नियुक्ति प्रक्रिया के मामले में विफल है. ऐसे में प्रदेश भाजपा के झंडाबरदारों से सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए, कि उन्होंने पांच साल के अपने शासन में नियुक्तियां क्यों नहीं की? दावें तो एक लाख नियुक्तियों का किया गया था. करोडों रूपये खर्च कर रघुवर सरकार ने 3.10 लाख के एमओयू को जमीन पर उतारने की बात कही थी. जिससे राज्य के हजारों युवाओं को नौकरी मिलनी थी. लेकिन, डबल ईंजन सरकार वादों पर क्यों खरी नहीं उतरी. और मोमेटम झारखंड ने घोटाला का रूप कैसे ले लिया. भाजपा नेता ईमानदार हैं तो उन्हें इस मामले में भी अपनी जबान खोलनी चाहिए.

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