प्रतिशोध की भावना से

प्रतिशोध की भावना से काम नहीं करेंगे, लेकिन गड़बड़ी को बर्दाश्त भी नहीं करेंगे

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार को गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने शपथ लेते हुए कहा था कि उनकी सरकार प्रतिशोध की भावना से काम नहीं करेगी, लेकिन किसी भी कीमत पर गड़बड़ी को बर्दाश्त भी नहीं करेगी। अब उनके कहने का मतलब साफ होता जा रहा है। वे शक्तिशाली माने जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं चूक रहे हैं।

हालाँकि, सत्ता संभालने के ठीक एक महीने बाद, उन्होंने झारखंड के सर्वशक्तिमान इंजीनियर रासबिहारी सिंह को निलंबित कर इसके संकेत दिए थे। रासबिहारी सिंह की ताकत और पहुंच का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वह एक साथ कई विभागों के प्रमुख थे। और वह अंतिम निर्णय लेता था कि किस ठेकेदार को राज्य सरकार का निर्माण कार्य दिया जाना चाहिए।

रामकृपाल कंस्ट्रक्शन के निदेशक रंजन सिंह, झारखंड के चर्चित व रघुवर सरकार के दुलुरुआ ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई है। राजनीतिक गलियारे में, रंजन सिंह को एक अलग प्रभावक के रूप में जाना जाता था। कंपनी ने नक्सलियों को फंडिंग की है और एनआईए टेरर फंडिंग मामले की जांच कर रही है।

बांध को गिराने वाले चूहों को खिलाफ कार्यवाही जारी है

मुख्यमंत्री ने पिछले तीन वर्षों के दौरान जल संसाधन विभाग में सभी निविदाओं की जांच के आदेश दिए हैं। कोनार बांध परियोजना का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किया था, जो अगले ही दिन बह गया। यह कहा गया कि चूहों ने बांध को गिरा दिया। तीन सौ करोड़ रुपये का यह पूरा प्रोजेक्ट बर्बाद हो गया था। लेकिन विभाग के ताक़तवर इंजीनियर लॉबी का बाल भी बांका नहीं हुआ। हेमंत सोरेन की कार्रवाई के कारण इस लॉबी में जबरदस्त दहशत है। वहीं इसके राजनीतिक सरपरस्त बेचैन हो रहे हैं।

प्रतिशोध की भावना से काम नहीं करेंगे

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा बीडीओ ललन कुमार को बर्खास्त किया गया

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने रांची जिले के बुंडू प्रखंड के तत्कालीन बीडीओ ललन कुमार को बर्खास्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वहीं, हजारीबाग जिले के कटकमदाग प्रखंड की तत्कालीन बीडीओ प्रीति सिन्हा के खिलाफ दो वेतन वृद्धि पर रोक को बरकरार रखने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।

ललन कुमार पर आरोप है कि उन्होंने जिला प्रशासन से योजना संहिता प्राप्त करने से पहले योजना के कार्यान्वयन के लिए स्वैच्छिक संगठनों को आदेश जारी किए। जबकि प्रीति सिन्हा ने मनरेगा योजनाओं के तहत ब्लॉकों में लक्षित न्यूनतम 100 मानव-दिनों में से केवल 19 मानव-दिवस सृजित कर पाए। और डोभा निर्माण के कुल लक्ष्य 507 में से केवल 81 डोभा का ही क्रियान्वयन शुरू करा पाए। साथ ही, केवल 28 प्रतिशत जॉब कार्ड सत्यापित करा पाई और विभागीय निर्देशों के विरुद्ध, वित्तीय वर्ष 2014-15 और 2015-16 और 2016-17 की लंबित योजनाओं को पूरा नहीं करने का आरोप है। 

मसलन, झारखंड सरकार पिछले पांच वर्षों के दौरान झारखंड में हुई गड़बड़ी की लंबी सूची के खिलाफ कार्रवाई करती दिख रही है। अभी मोमेंटम झारखंड। एक दिन में पांच लाख युवाओं को नौकरी देने का मेगा शो। विदेश में रोड शो। राज्य में निर्माण कार्य। मतलब अभी सभी विभाग की गड़बड़ियों का कच्चा चिट्ठा खोला जाना बाकी है। विशेष रूप से हवाई घोषणाओं के गुब्बारे की हवा नकलना अभी बाकी है।

हेमंत सरकार उन गड़बड़ियों को सिरे से देख रही हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की इस शुरुआत की प्रशंसा भी की जा रही है। और यह प्रतिशोध कि भावना नहीं भ्रष्टाचार की पड़ताल मालूम पड़ती है।

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

This Post Has 5 Comments

  1. विवेक पांडेय

    पंचयात सचिव का परिणाम घोषित कर दिया जाए सर जी तीन साल से अधिक समय हो गया है!

  2. Deepu Khan

    Great sir .I salute hement Soren

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.