पौधारोपण ही प्रकृति संरक्षण : 72वां वन महोत्सव में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का सन्देश

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पौधारोपण
  • हेमन्त सोरेन 72वां वन महोत्सव में बतौर मुख्यमंत्री शामिल हुए. पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश
  • राज्य का 34% क्षेत्र वनाच्छादित
  • 2021 में 1 करोड़ 65 लाख पौधा लगाने का लक्ष्य निर्धारित
  • वन महोत्सव के दिन पूरे राज्य में लगे लगभग 5 लाख पौधे

खाली सरकारी भूमि पर पौधारोपण किया जाएगा

वन विभाग लोगों के बीच फलदार पौधों का वितरण करेगा

जंगल, पहाड़ और नदियां झारखण्ड का सम्मान

हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड

रांची. जल-जंगल और जमीन की पहचान पर खड़ा है झारखंड प्रदेश. इस प्रदेश में हरियाली की अनुपम छटा, सघन वन जैसे कई प्राकृतिक धरोहर, वरदान के रूप में प्रकृति ने सौंपा है. खनन लूट के मद्देनजर, राज्य गठन के बाद प्रदेश में पर्यावरण का भरपूर दोहन हुआ. बहुमूल्य पेड़ों की कटाई हुई. और आज प्रदेश विस्थापन को झेलते हुए प्रदूषण की चपेट में है. लेकिन झारखंडी अस्मिता को भान है कि अगर झारखंड के ये धरोहर समाप्त हुए तो झारखंड के मायने ही समाप्त हो जायेंगे. क्योंकि यहां के क्रांतिकारी पूर्वजों के कर्म बताते हैं कि प्रकृति का अमूल्य उपहार ही प्रदेश का जीवन है. और यहां बसने वाले जन-जीवन का जीने का आधार.

ऐसे में प्रदेश में जल, जंगल और जमीन सहेजा जाना किस हद तक आवश्यक हो सकता है. और तमाम परिस्थितियों के बीच झारखंड प्रदेश में वन महोत्सव की महत्ता को समझा जा सकता है. क्योंकि जिस प्रकार राज्य ने विकास की सीढ़ियां, प्रकृति को रौंदते हुए चढ़ा, मौजूदा दौर में चिंता का विषय है. जहाँ हमने लगातार विनाश को आमंत्रण दिया है. अगर जल्द सामंजस्य नहीं बैठाया गया तो खामियाजा भुगतने के लिए हमें तैयार रहना होगा. मसलन, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है. जिसके अक्स में 1 करोड़ 65 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित है. 

हेमन्त सोरेन 72वां वन महोत्सव में बतौर मुख्यमंत्री हुए शामिल

झारखंड के कैनवास में पौधारोपण ही प्रकृति संरक्षण के सन्देश के साथ हेमन्त सोरेन 72वां वन महोत्सव में बतौर मुख्यमंत्री शामिल हुए. उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि महामारी समेत कई प्राकृतिक आपदाएं अच्छा संकेत नहीं दे रही है. विकास के नाम पर पहाड़ों का खनन हो रहा है व खदानें खोदे जा रहें हैं. आधारभूत संरचना और उद्योग के नाम पर जंगल उजाड़े जा रहे हैं. इस दिशा में ध्यान देने की आवश्यकता है. लगातार नीतिगत फैसले लेने की आवश्यकता है.

पानी संरक्षण भी अति जरूरी 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन व सभ्यता का सृजन पानी के इर्दगिर्द हुआ है. और विकास के मार्ग को भी प्रशस्त करता है. जल युगों तक हमें संभाल सकता है. हमें रोटी दे सकता है. रांची में कई बड़े तालाब और डैम हैं. लेकिन, पिछली सरकार में उन तमाम जीवनदाई जलस्रोतों की चौहद्दियों को कंक्रीट के सीमेंट से भरा जाना दुर्भाग्यपूर्ण हैं. जो दर्शाता है कि हम जलाशयों के संरक्षण के प्रति कतई गंभीर नहीं रहें. मसलन, यदि हम अब भी न चेतें और कोई ठोस कदम न उठाया तो गंभीर परिणाम देखने को मिल सकता है. जिसके कारक केवल हम ही होंगे.

खाली भूमि पर पौधा लगाएं 

मुख्यमंत्री ने राज्य की तमाम जनता से अपील की और राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी खाली भूमि पर पौधारोपण करें. वन विभाग लोगों के बीच फलदार पौधों का वितरण करे. जिससे लोग पर्यावरण के प्रति सजग हों और जागरूकता के साथ मुहीम में जुड़े. शुरुआत के तौर पर पर्यावरण एवं जलवायु विभाग की ओर से प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने मुख्यमंत्री को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया.

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