घड़ियाली आंसू बहाने वाले झारखण्ड भाजपा नेता पढें, पार्टी नेता ‘स्वामी’ ने तंज कस क्यों कहा, ‘वित्त मंत्रालय को कर दें बेरोजगार’

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स्वामी ने तंज कस कहा वित्त मंत्रालय को कर दें बेरोजगार

शर्मनाक, हर साल 2 करोड़ रोज़गार देने वाली मोदी सरकार सत्ता में देश में बेरोजगारी दर 8.1 प्रतिशत -अपने उच्चतम स्तर पर -‘स्वामी’ जी का तंज

रांची. घड़ियाली आंसू बहा हेमन्त सरकार पर रोजगार न देने के आरोप के मद्देनजर, झारखण्ड के भाजपा नेता बताये कि क्यों देश का बेरोजगारी अपने उच्चतम स्तर 8.1% को छू गया है. हालांकि रोजगार को लेकर आरोप निराधार ही हैं. क्योंकि केंद्र की मदद के बिना कोरोना-जंग जीतने के बाद हेमन्त सरकार का रोजगार की दिशा में तेजी से कार्य करना, उन्हें किसी भाजपा सत्ता से आगे की पंक्ति में ला खड़ा करता है. लेकिन, प्रदेश भजपा को केवल हवाई मुद्दों के आधार पर प्रदेश के युवा को भ्रमित कर, राजनीति करने से मतलब भर है.

यदि ऐसा नहीं है तो प्रदेश भाजपा नेताओं को मंचों से जरुर बताना चाहिए कि मोदी सत्ता में, क्यों देश में बेरोजगारी इतनी तेजी से बढ़ रही है. बढ़ोतरी भी ऐसे कि उनके ही पार्टी नेता सह राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने, मोदी सरकार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन पर तंज कसना शुरू कर दिया है. ज्ञात हो, तंज कसते हुए भाजपा सांसद ने कहा है कि “इसका इलाज सिर्फ यह है कि पूरे वित्त मंत्रालय को बेरोजगार कर दिया जाए, क्योंकि वह पहले से ही काम नहीं कर रहा.” 

भाजपा नेता का बढ़ती बेरोजगारी पर तंज, 2 करोड़ रोजगार का वादा साबित हुआ फिसड्डी

दरअसल, भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का तंज, देश में बड़े पैमाने पर बढ़ती बेरोजगारी की विभीषिका को दर्शाने भर के लिए काफी है. ज्ञात हो, हर साल देशवासियों को 2 करोड़ रोजगार देने के वादे के साथ सत्ता में आयी थी मोदी सरकार. लेकिन उसकी गलत नीतियों के अक्स में आज देश में बेरोजगारी दर अपने ही रिकॉर्ड स्तर को पार करते हुए पिछले छह हफ्तों नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी के जारी रिपोर्ट में, अगस्त के पहले हफ्ते तक बेरोजगारी दर 8.1 प्रतिशत है, जो कि अब तक का उच्चतम स्तर पर है.

इससे पहले जुलाई के पहले हफ्ते में यह दर 7.3 प्रतिशत थी. वहीं जुलाई के तीसरे हफ्ते में 5.98 प्रतिशत पर रही. इस तेज गति की वृद्धि दर से देश में बेरोजगारी का अंदाजा लगाया जा सकता है. देश में बढ़ते बेरोजगारी के मद्देनजर जब ऑफिशियल ट्विटर पर एक यूजर्स द्वारा बेरोजगारी पर पूछे सवाल पर भाजपा सांसद का अपनी ही सरकार पर तंज कसना. और वित्त मंत्रालय में बदलाव की बात तक कह देना. मोदी सरकार के नीतियों का दिवालियापन दर्शाने के लिए काफी हो सकता है.

रिपोर्ट चिंतनीय, जुलाई में सृजित सभी रोजगारों की गुणवत्ता खराब

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी ने बेरोजगारी के जो आंकड़े जारी किए हैं, वह काफी चिंतनीय है. इसके मुताबिक जुलाई में देशभर में जहां 1.6 करोड़ रोजगार के अवसर सृजित हुए, वहीं इस अवधि में वेतन वाली नौकरियां 32 लाख तक घट गयी. इससे भी चिंतनीय यह है कि जुलाई में सृजित रोजगार की ‘गुणवत्ता’ काफी खराब रही. क्योंकि करीब 1.86 करोड़ अतिरिक्त लोग छोटे व्यापारी तथा दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे.

पहली बार सुब्रमण्यम स्वामी ने नहीं कसा हैं तंज

सुब्रमण्यम स्वामी ने कोई पहली बार वित्त मंत्रालय और उनके मंत्री निर्मला सीतारमण पर सवाल खड़ा नहीं किए हैं. इससे पहले भाजपा सांसद ने वित्त मंत्री के कोविड-19 महामारी को एक्ट ऑफ गॉड करार देने के बयान पर भी तंज कसा था. भाजपा नेता कहा था कि सरकार की नीतियों के कारण देश में गिरती जीडीपी रेट का कारण भी एक्ट ऑफ गॉड है?

एक सर्वे में मिली जानकारी, एनडीए शासित राज्यों में बेरोजगारी का दर सर्वाधिक

हाल ही में पांच राज्यों (बिहार, झारखण्ड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) में बेरोजगारी की दर को लेकर एक सर्वे किया गया. इसमें झारखण्ड को छोड़कर बाकी चार भाजपा शासित एनडीए राज्य हैं. सर्वे में बेरोजगारी का भयावह रूप सामने आया है. विशेषकर एनडीए राज्यों में तो बेरोजगारी में ग्रेजुएट लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है. चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें बिहार राज्य सबसे आगे हैं. 

इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2021 में भी दावा किया गया था कि 50 फीसदी भारतीय ग्रेजुएट्स नौकरी के लायक ही नहीं हैं. ऐसे में यह सवाल जरूर प्रसांगिक हो चला है कि मोदी सरकार में देश की शिक्षा व्यवस्था किस तरह से पिछड़ रही हैं.

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