मृतकों के परिजनों को सांत्वना व न्याय दिलाने को जहाँ प्रयासरत दिखे मुख्यमंत्री, वहीं भाजपा नेता अपराधियों को शह देने में

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न्याय दिलाने को प्रयासरत दिखे मुख्यमंत्री

न्याय दिलाने के मद्देनजर, एक न्यायाधीश और महिला थानेदार के परिजनों के साथ सीएम हेमन्त सोरेन का व्यवहार न केवल सराहनीय है बल्कि एक मुखिया के स्वरूप को परिभाषित करता है

रांची. राजनीतिक व्यक्तित्व का पहला काम जनता को हर तरह से सपोर्ट करना होता है. जनता के परेशानियों को खत्म करने पर उसका जोर होता है. मौजूदा दौर में झारखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन यह काम ईमानदारी के साथ बखूबी निभाते दिखते हैं. बीते दिनों राज्य में घटी घटनाचक्र ने दो विचारधाराओं की सच्चाई को सतह पर लाया है. राज्य में घटी ऐसी दो घटनाएं, जिससे संबंधित परिजनों को काफी परेशानी हुई, उन्हें बतौर संवेदनशील मुख्यमंत्री, हेमन्त सोरेन ने मिलकर जो सपोर्ट दिखाया, वह न केवल काबिले तारीफ हैं, बल्कि राज्य के मुखिया के स्वरूप को परिभाषित करती है.

मुख्यमंत्री सोरेन ने जहाँ एक तरफ इन मामलों से संबंधित परेशान परिजनों को ढांढस बढ़ाया, 

न्याय दिलाने का भरोसा दिया. पहली घटना एक महिला थानेदार की आत्महत्या और दूसरी एक न्यायाधीश के मौत के मामले से जुडी है. मुख्यमंत्री ने सांत्वना देने के साथ परिजनों को हर संभव न्याय दिलाने का भरोसा दिया. वहीं, दूसरी तरफ इसी दौरान प्रदेश भाजपा नेताओं का राज्य में अपराधियों को शह देने जैसे असंवैधानिक छवि भी सतह पर दिखी. ज्ञात हो, मुख्यमंत्री के सुरक्षा काफिले पर हुए सुनियोजित हमले के मुख्य आरोपियों के साथ भाजपा नेता प्रेमपूर्वक मिलकर साबित कर रहे हैं कि भाजपा सत्ता की लालसा में किसी भी हद तक उतर सकती है.

न्यायाधीश के परिजनों को जल्द न्याय मिले, इसके लिए एसआईटी के बाद सीबीआई जांच का निर्देश 

न्यायाधीश उत्तम आनंद के कथित तौर पर हुए मौत के बाद उनके परिजनों से मिलकर मुख्यमंत्री सोरेन ने अपनी संवेदना व्यक्त की. उन्होने कहा कि दुख की घड़ी में सरकार उनके साथ है. और परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मामले की जांच को लेकर राज्य सरकार गंभीर है. तेज गति से घटना का अनुसंधान कर परिजनों को न्याय दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है. मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर मामले में एसआइटी गठित की गयी थी. लेकिन फिर स्वतः ही मुख्यमंत्री द्वारा न्यायाधीश के मौत मामले में सीबीआई जांच का निर्देश दिया गया. 

दरअसल, ऐसा करने के पीछे मुख्यमंत्री का उद्देश्य है कि राज्य में पीड़ित परिजनों को जल्द न्याय मिले. बता दें कि धनबाद के रणधीर वर्मा चौक के समीप न्यायाधीश उत्तम आनंद की एक ऑटो से कथित टक्कर से उस वक्त संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी, जब वे मॉर्निंग वॉक के लिए अपने घर से गोल्फ ग्राउंड जा रहे थे.

रूपा तिर्की के परिजनों से मिले हेमन्त, घटना को मर्माहत बताते हुए दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा 

मुख्यमंत्री ने महिला थानेदार रूपा तिर्की के परिजनों से मिलकर सांत्वना दिया और न्याय दिलाने का भी भरोसा दिया. जब परिजन ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच करा न्याय दिलाने व दोषी को सख़्त सजा दिलाने की मांग की, तो हेमन्त सोरेन का नम आंखों व लरजते जुबान से कहना – ‘रूपा तिर्की मेरी बहन थी’, अपने आप में मुख्यमंत्री के मंशे को जताने भर के लिए काफी है. 

आदिवासी समाज की महिला पुलिस पदाधिकारी की मौत से वे काफी मर्माहत दिखे. उन्होंने बार-बार दुहराया कि मामले में न्याय जरूर मिलेगा. निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया है. झारखंड हाइकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगे. श्री सोरेन ने कहा, हर हाल में रूपा तिर्की की मौत का इंसाफ होगा.

अपराधियों का मन बढ़ाने के लिए सम्मान दिलाने में आगे दिख रहे भाजपा नेता 

वहीं दूसरी तरफ इसी दौरान प्रदेश भाजपा के नेताओं को अपने तमाम नैतिकताओं को तिलांजलि देते देखा गया. उन्होंने राज्य में अपराधियों का मनोबल बढ़ाने का काम किया. ज्ञात हो, मुख्यमंत्री के सुरक्षा काफिले पर हुए हमले के मुख्य आरोपी (जिसका नाम भैरव सिंह है.) तीन दिन पहले ही जेल से जमानत पर रिहा हुआ है. भाजपा ने इस प्रसंग को राज्य में ऐसे पेश किया कि मानो भाजपा नेताओं की जीत हुई है. होर्डिग-पोस्टर लगा कर एक गुंडे का स्वागत किया गया.

भाजपा के बाबूलाल मरांडी, मेयर आशा लकडा जैसे नेता आरोपी भैरव सिंह से गर्मजोशी से मिले. उसको अपने आवास में बुलाकर सम्मान भी किया. हालांकि, अपराधियों को सम्मान देने का रिवाज भाजपा नेताओं के लिए कोई नया नहीं है. मॉब लिंचिग मामले में आरोपी जब जेल से छूटे थे, तो हजारीबाग के भाजपा सांसद जयंत सिन्हा ने भी आरोपियों को गले में माला पहनाकर स्वागत किया था. मसलन, भाजपा नेताओं ने सिद्ध कर दिया कि वह सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं.

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