नवीकरणीय ऊर्जा : सीएम की सोच से जगा विश्वास, भविष्य में नहीं होगा झारखण्ड में ऊर्जा की कमी

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नवीकरणीय ऊर्जा

नवीकरणीय ऊर्जा : सोलर ऊर्जा को बढ़ावा के लिए हर संभव मदद के साथ सीएम की झारखण्डवासियों से अपील, “अनाज और सब्जी की तरह अपनी बंजर ज़मीन करें बिजली की खेती”

रांची : जंगलों से घिरा झारखण्ड प्रदेश में खनिज सहित कई चीजों की अनुकूल संभावनायें है. ऊर्जा के क्षेत्र में कोयला के प्रचुर भंडार इसमें से एक हैं. हालांकि यह भंडार सीमित है. भविष्य में इसकी कमी हो सकती है, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है. सूबे के मुखिया हेमन्त सोरेन ने भविष्य को देखते हुए कहा है कि आज ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों को विकसित करने का समय आ चुका है. ऐसे में राज्य में सोलर पावर और जल विद्युत परियोजनाओं से बिजली उत्पादन के क्षेत्र में संभावनाएं तलाशी जानी चाहिए.

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने राज्य में सोलर पावर को राज्य में बढ़ावा देने का काम शुरू किया है. काम भी ऐसा, जिसकी तारीफ की जानी चाहिए. दरअसल, हेमन्त सोरेन देशभर के ऐसे पहले सीएम होंगे, जिन्होंने राज्यवासियों से अपील की है कि वे अनाज और सब्जी की तरह अपने बंजर ज़मीनों पर बिजली की भी खेती करें. राज्य सरकार ऐसा करने के लिए उन्हें हर संभव मदद करेगी. 

सरप्लस बिजली को खरीदेगी सरकार, आमदनी में होगा इजाफा, विकास में बनेंगे भागीदार

बीते अक्टूबर माह को चतरा के इटखोरी में नवनिर्मित ग्रिड सब स्टेशन एवं चतरा-लातेहार ट्रांसमिशन लाइन का शुभारंभ करने के साथ सीएम ने एक अनोखी घोषणा की. उन्होंने लोगों से कहा कि वे अनाज और सब्जी की खेती की तरह बिजली की भी खेती करें. अपनी बंजर भूमि और घर की छत का इस्तेमाल सोलर पावर प्लांट लगाने में करें. इससे ना सिर्फ अपने लिए बिजली का उत्पादन कर सकेंगे, बल्कि सरप्लस बिजली सरकार खरीदेगी. इससे उनकी आमदनी में इजाफा होगा और वे राज्य के विकास में भागीदार बनेंगे. 

सोलर पावर उत्पादन के लिए सीएम ले चुके हैं पहले ही बड़े-बड़े निर्णय

सोलर पावर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने पहले भी कई बड़े निर्णय लिए हैं. जून 2021 को ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि गिरिडीह जिले को सोलर सिटी के तौर पर विकसित किया जाएगा. इसपर कैबिनेट से स्वीकृति भी मिल चुकी है. डीपीआर बनाने का काम भी शुरू हो गया है. 

जिले में पावर प्लांट्स लगने से नॉर्थ कर्णपुरा से 500 मेगावाट, पीवीयूएनएल से 2040 मेगावाट, फ्लोटिंग सोलर से 100 मेगावाट और अडानी पावर से 400 मेगावाट बिजली की आपूर्ति हो सकेगी. इसी तरह रांची एयरपोर्ट की खाली जमीन और ज्रेडा द्वारा देवघर, सिमड़ेगा, पलामू और गढ़वा में 20-20 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा. ज्रेडा की योजना के तहत जमीन आवंटन प्राप्त कर केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को स्वीकृति के लिए भेजा गया है.

नवीकरणीय ऊर्जा के लिए सरकार कई बेहतर योजना पर कर रही काम

नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कई बेहतर योजना के तहत काम करने जा रही है. इसमें सुदूर इलाकों में सोलर माइक्रो, मिनी ग्रिड योजना, सिकिदरी कैनाल पर दो मेगावाट का ग्रिड विकसित, गिरीडीह में सोलर सिटी, विभिन्न शहरों में सोलर पार्क का निर्माण, 125 मेगावाट क्षमता की माइक्रो और मिनी हाइडेल प्लांट विकसित करने के साथ ग्रामीण इलाकों में छोटे कोल्ड स्टोरेज का संचालन का सौर ऊर्जा के जरिए करने की योजना है. इससे ग्रिड सप्लाई और डीजल पर निर्भरता कम होगी, साथ ही प्रदूषण और वेस्टेज भी कम होगा.

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