झारखण्ड : नक्सल क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तराशने हेतु लांच हुआ -SAHAY

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SAHAY

झारखण्ड में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने नक्सल क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए लांच किया SAHAY योजना. (SPORT’S ACTION TOWARDS HARNESSING ASPIRATION OF YOUTHS)

  • सहाय योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में, खेल क्षेत्र में युवा भर सकेंगे अपने सपनों में रंगह… खेल प्रतिभा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखा सकेंगे चमक.
  • चाईबासा, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, गुमला एवं सिमडेगा के 14 से 19 वर्ष के 72 हजार युवा दिखाएंगे खेल में हुनर.

जहां गोलियों की आवाज सुनाई देती है, वहां अब SAHAY योजना से गूंजेंगे खिलाड़ियों और पर्यटकों के ठहाके.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में होंगे खेल की नर्सरी स्थापित.

युवा खेल क्षेत्र में अपना हुनर दिखाने आएं आगे

हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड

मुख्यमंत्री ने कोल्हान की धरा से ‘SAHAY योजना’ का किया शुभारंभ 

रांची : खेल और खेल प्रतिभा को बढ़ावा देने के प्रति संजीदा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कोल्हान की धरा से ‘SAHAY’ योजना’ का शुभारंभ किया. योजना के जरिये प्रथम चरण में नक्सल प्रभावित क्षेत्र चाईबासा, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, गुमला एवं सिमडेगा के 14-19 वर्ष के 72000 युवक – युवतियों को खेल के क्षेत्र में हुनर दिखाने का अवसर मिलेगा. पंचायत, वार्ड, प्रखंड एवं जिला स्तर तक खेल में प्रतिभाशाली युवाओं को हॉकी, फुटबॉल, बॉलीबॉल, एथलेटिक्स समेत अन्य खेलों में अपना हुनर दिखाने का अवसर मिलेगा.

इस योजना को खेल विभाग द्वारा योजना संचालित किया जायेगा. ‘SAHAY’ योजना का मुख्य उद्देश्य खेल के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्र में युवाओं के हुनर को नयी पहचान देकर उन्हें सकारात्मक जीवन की ओर प्रेरित करना है. योजना के तहत आयोजित प्रतियोगिताओं में जिला एवं राज्यस्तर पर विजेता खिलाड़ियों और उप-विजेता खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित भी किया जाएगा.

कुछ क्षेत्रों का बनाया गया भयावह चित्र

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा – वर्षों से झारखंड के कुछ क्षेत्र नक्सल प्रभावित रहा है. इसे और भयावह बनाने का प्रयास भी अन्य लोगों द्वारा किया गया. ये वैसे हो सकते हैं जो यहां के आदिवासी, मूलवासी, भाषा, संस्कृति और परंपरा के संबंध में जानकारी नहीं रखते. उन लोगों ने जैसा चित्र गढ़ दिया, उसे ही झारखण्ड की सच्चाई मान ली गयी और उससे अब हम उबर नही पाए हैं. लेकिन, हमें आगे बढ़ कर इस चित्र को बदलने का प्रयास करना है. झारखण्ड के सुदूरवर्ती जंगलों में मुस्कान कायम करना है और खुशहाल वातावरण बनाना है. खेत, खलिहान, कस्बों में सकारात्मक वातावरण सृजन का प्रयास होगा, जिससे हमारे नौजवानों को कोई बहलाया-फुसलाया ना सके.

ऐसे क्षत्रों में होंगे खेल की नर्सरी स्थापित 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खेल की नर्सरी स्थापित करेंगे. इन क्षेत्रों की अलग पहचान गढ़ने का प्रयास होगा. हमने खेल को माध्यम बनाया है, क्योंकि समाज में प्यार-सौहार्द कायम करने के लिए खेल एक बेहतरीन जरिया है. अब इन क्षेत्रों में गोलियों की गूंज की जगह खिलाड़ियों और पर्यटकों के ठहाकों से गुंजायमान होगा. यह काम पहले भी हो सकता था क्योंकि इन क्षेत्रों के लोगों को अबतक सरकारी स्तर पर न कोई रास्ता नहीं दिखाया गया और ना ही पूर्व की किसी सरकार में कोई इच्छाशक्ति ही दिखी. जबकि इन क्षेत्रों के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं थी.

ज्ञात हो खेल के क्षेत्र में झारखण्ड के खिलाड़ी देश-दुनिया में धमाल मचा रहे हैं. इसी मंशे के तहत राज्य के ऐसे रेखांकित क्षेत्रों में खेल और खिलाड़ियों में छुपे प्रतिभा को खोज कर उसे बढ़ावा देने के उद्देश्य से सहाय SAHAY’ योजना शुरू की गई है. इन क्षेत्रों में हर स्तर पर खेल का आयोजन होंगे. व्यक्तिगत रूप से मेरी योजना पर नजर है. खिलाड़ियों से आग्रह है कि वे आगे आएं. सरकार आपके साथ है. इस अवसर पर मंत्री आलमगीर आलम, मंत्री श्रीमती जोबा मांझी, मंत्री सत्यानंद भोक्ता, मंत्री हफीजुल अंसारी, सांसद श्रीमती गीता कोड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री मधुकोड़ा, विधायक व खिलाड़ी उपस्थित थे.

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