मोदी सरकार की नीतियों से अंधभक्तों को झटका, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में सच्चाई उजागर

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अंधभक्तों

कल तक मोदी सरकार के नीतियों को कोसने वाले बाबूलाल जी भी अंधभक्तों के भांति आज सत्ता मोह में चुप

ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स और ग्लोबल हंगर इंडेक्स दोनों में पिछड़ देश, मोदी नीतियों का महिमामंडन करने वाले अंधभक्तों को अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट पर चिंतन करना चाहिए

हेमंत सोरेन भी कह चुके है कि कोई अगर मोदी सरकार से सवाल पूछे, तो वह केंद्र की नजर में देशद्रोही है

रांची। मई 2014 को केंद्र की सत्ता में आई मोदी सरकार के साढ़े छह साल के कार्यकाल का बीजेपी नेताओं ने अंधभक्ति के साथ खूब महिमामंडन किया है। अंधभक्ति भी कि जहाँ सही-गलत का वे पहचान करने से परहेज भी करने लगे। देश हो या विदेश, हर जगह इन अंधभक्तों द्वारा मोदी सरकार की नीतियों के तारीफों के पुल बांधे गए। कोई अगर सवाल पूछने की जहमत भी करें, तो उसे देशद्रोही बता दिया जाता। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कई बार दोहरा चुके है कि अगर कोई सवाल पूछे तो वह केंद्र की नजर में देशद्रोही हैं।

कोई भी रिपोर्ट अगर मोदी सरकार की कमियों को बताने की कोशिश की, तो अधंभक्तों द्वारा उसे दबाने का काम किया गया। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिपोर्ट को दबाने की ताकत शायद इन अंधभक्तों के पास नहीं है। यही कारण है कि 2020 में अंतरराष्ट्रीय स्तर के दो रिपोर्टों ने मोदी सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। यह सवाल राष्ट्र मानव विकास प्रोग्राम (UNDP-United Nation Development programe) की ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स और ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट से खड़ा होता है। 

ह्रयूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में भी पिछड़ा भारत, अन्य देशों की तुलना में घटी प्रगति

पहले तो यह जानना जरूरी है कि ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स क्या है। दरअसल यह इंडेक्स हमें बताता है कि किसी देश के लोगों के समक्ष स्वास्थ्य, शिक्षा की स्थिति कैसी है। उनका जीवन स्तर कैसा है। पाकिस्तान के अर्थशास्त्री महबूब अल हक ने इस ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स को बनाया था। यह रिपोर्ट हर साल जारी होती है। 

2020 की रिपोर्ट को देखे, तो भारत 189 देशों की लिस्ट में पिछले साल 2019 के रैंक 130 से फिसलकर 131  पर पहुंच गया है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र मानव विकास के रेजिडेंट प्रतिनिधि ने कहा कि भारत की रैंकिंग में गिरावट का अर्थ यह नहीं कि भारत ने अच्छा नहीं किया, बल्कि इसका अर्थ है कि अन्य देशों ने बेहतर किया। लेकिन इससे तो यह भी पता चलता है कि अन्य देशों के तुलना में भारत ने एक साल में थोड़ी कम प्रगति की। 

क्रय शक्ति समता में भी भारत की हुई गिरावट

UNDP की इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के मापदंड पर भी भारत की गिरावट हुई है। इस मापदंड के आधार पर वर्ष 2018 में भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय 6,829 अमेरिकी डॉलर थी, जो वर्ष 2019 में गिरकर 6,681 डॉलर हो गयी। और हर मापदंड में हो रहे गिरावट को मोदी समर्थक मानने को तैयार नहीं होंगे। वे यह नहीं कहेंगे कि मोदी सरकार की नीतियों में कुछ तो कमी जरूर है, जिससे भारत की रैकिंग में लगातार कमी आ रही है। 

ग्लोबल इंडेक्स रिपोर्ट देश-विदेश में मोदी सरकार की नीतियों खड़ा करती है सवाल

18 अक्टूबर 2020 को अंतरराष्ट्रीय संस्था “इंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट” ने अपनी सलाना रिपोर्ट ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) रिपोर्ट-2020 जारी की थी। यह रिपोर्ट किसी देश में कुपोषित बच्चों के अनुपात, पांच साल से कम आयु वाले बच्चे( जिनका वजन या लंबाई उम्र के हिसाब से कम है और पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों में मृत्यु दर के आधार पर तैयार की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब भी काफी भुखमरी मौजूद है। 107 देशों की सूची में भारत को 94वें स्थान दिया गया है। 27.2 के स्कोर के साथ भारत भूख के मामले में ‘गंभीर’ स्थिति में है। 

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र था कि सूचकांक में दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान को छोड़कर बाकी सभी देश भारत से ऊपर के पायदान पर है। भारत 94वें और अफगानिस्तान 97वें स्थान पर। वहीं आस-पास के बाकी देशों में पाकिस्तान 88वें, म्यांमार 78वें, बांग्लादेश 75वें, नेपाल 73वें और श्रीलंका 64वें स्थान पर थे। यानी रिपोर्ट के मुताबिक अन्य देश भारत से बेहतर स्थिति में है। लेकिन मोदी अंधभक्तों को कौन बताए कि यह भूखमरी की स्थिति न केवल देश बल्कि विदेशों में भी मोदी सरकार की कमियों को उजागर करती है।

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