7 साल V/S 1.5 साल : लाशों की ढेर पर राजनीति करने वाले भाजपाई हेमन्त सरकार की कार्यशैली की कर रहे हैं आलोचना

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योगी आदित्यनाथ का बगावत

भाजपा की उपलब्धि – “देश तोड़ना और किसान, मजदूर, दबे कुचलों का शोषण करना”,  तो मुख्यमंत्री हेमन्त सरकार के नेतृत्व में झारखण्ड लिख रहा है अपना अलग इतिहास 

खुद की समीक्षा न कर भाजपा नेता हेमन्त सरकार पर कोविड प्रबंधन विफलता का लगा रहे आरोप

रांची. झारखण्ड प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में पार्टी नेता हेमन्त सरकार की आलोचना की रणनीति बनी । दिलचस्प पहलू है कि भाजपा का केंद्र में अभी तक 7 और प्रदेश में 5 साल विफल सरकार देने के बावजूद, पार्टी नेता हेमन्त सरकार पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं. आश्चर्य है कि समाज को तोड़ने का काम करने वाली विचारधारा ऐसा आरोप लगा रहे हैं. कोरोना काल में लाशों के ढेर पर राजनीति करने, किसान-मजदूर के मांगों को अनदेखी करने और अपनी गलत नीतियों से महंगाई बढ़ाकर लोग को मारने वाले बीजेपी नेताओं द्वारा हेमन्त सरकार की आलोचना करना तर्कहीन हैं. 

केवल डेढ़ साल की अवधि में, हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में जिन झारखंडियों ने देश के मानचित्र में, टॉप पांच के पायदान में खड़ा होने की लडाई लड़ी. बीजेपी व उसके नेताओं द्वारा झारखण्ड को आर्थिक तौर पर परेशान करने के बावजूद मजबूती से लड़ाई लड़ी. ज्ञात हो, महामारी के संकट में भी केंद्र द्वारा GST क्षतिपूर्ति राशि नहीं दिया गया, डीवीसी पर खुद की सरकार के बकाया के नाम पर करोड़ों की कटौती की. कोरोना वैक्सीन देने के नाम पर राज्य के साथ पक्षपात करने के बावजूद यदि झारखंड भाजपा शासित राज्यों से पीछे रहे. तो समझा जा सकता है कि भाजपा “बनी बात में झगडा डालो, कुछ तो पंच दिलाएगा”, की नीति पर कार्य कर रही है. 

बीजेपी की कोविड प्रबंधन – देश ऑक्सीजन की कमी से जानें गयी, सैंकड़ों लाशें नदियों में लोग बहाने को हुए विवश 

गुरूवार को बीजेपी कार्यसमिति में कहा गया कि हेमन्त सोरेन की सरकार कोरोना संक्रमण में संवेदनशील नहीं रही है. कोविड प्रबंधन पूरी तरह से विफल रही है. बीजेपी नेताओं ने यह नहीं बताया कि  झारखण्ड में ऑक्सीजन की कमी से मौतें नहीं हुई, जैसे भाजपा शासित राज्यों में हुई. कर्नाटक और मध्यप्रदेश ऐसे ही बीजेपी शासित राज्य है, जहां कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई. बीजेपी नेता यह भी कहने से बचते रहे कि उनके शासित राज्य उत्तर प्रदेश में कोविड प्रबंधन की असफलता के कारण ही सैंकड़ो लाशों को गंगा में बहाया गया. 

बाबूलाल क्यों नहीं कहते, रघुवर राज में शाह ब्रदर्स के सहयोग से खनिज संसधानों की लूट हुई 

दलबदलू का पर्याय बन चुके बाबूलाल मरांडी की सोच ही नकारात्मक प्रवृति की हो चली है. जब वे जेवीएम में थे, तब उन्हें रघुवर दास सरकार की खामियां दिखती है. लेकिन अब जब वह भाजपा में हैं, तो उन्हें अब वह खामियां नहीं दिखती. हेमन्त सरकार पर वह चुपके से आरोप लगाते हैं कि केवल टेंडर मैनेज का खेल हो रहा है. खनिज संसाधनों की लूट मची है. लेकिन भाजपा के मंच से कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते कि रघुवर राज में शाह ब्रदर्स के सहयोग से खनिज संसाधनों की लूट हुई. गोड्डा में अडाणी जैसे पूंजीपतियों को गरीब आदिवासी दलित जमीनों को कौड़ियो के दाम सौंपा गया. झारखण्ड की हर योजना का ठेका गुजरातियों को दिया जा रहा था. 

विफल प्रबंधन का दंश झेल रहे पीड़ितों को 4 लाख आर्थिक मदद नहीं देना चाहते, छह माह से अधिक समय से धरने पर बैठे किसान को उनका हक नहीं देना चाहते 

कार्यसमिति में कहा गया है कि महामारी में अनाथ बच्चों को सहारा दिया गया है. किसानों की आय दोगुनी करने के लिए तीन कानून लाये गये हैं. बीजेपी नेताओं का यह दावा कितना खोखला है. जो सरकार कोरोना पीड़ितों को आर्थिक मदद नहीं देना चाहती, वह अनाथ बच्चों को क्या मदद देगी. बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में पूछे सवाल पर केंद्र ने कहा था कि कोरोना से मरे परिजनों को आर्थिक मदद देने की स्थिति में केंद्र नहीं है. हालांकि कोर्ट ने इस दलील से अलग कहा है कि आर्थिक मदद तो देना ही होगा. किसानों के आय दोगुने करने का दावा करने वाले बीजेपी नेता अपने मंच से यह क्यों नहीं कहते. आखिर किसान पिछले छह माह से क्यों दिल्ली बॉर्डर में धरने पर बैठे हैं. 

सत्ता संभालते ही हेमन्त सरकार ने कोरोना का दंश झेला है, पर सीएम के नेतृत्व में झारखण्ड जरुर लिखेगा अपना इतिहास

बीजेपी नेता का हेमन्त सोरेन सरकार पर आरोप  बेबुनियाद और खोखला है. क्योंकि कि हेमन्त सरकार में झारखंडियों के हितों में काम हो रहा है. हालांकि, सत्ता संभालते ही जिस तरह कोरोना महामारी का असर राज्य में दिखा है, उससे विकास का काम सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है. इसके अलावा केंद्र की मोदी सरकार ने भी हेमन्त सरकार को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. लेकिन सीएम हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड अपना अलग इतिहास लिखने में जरुर सफल हो सकता है.

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