नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति

क्या मनुस्मृति का आगाज है नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

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के0 कस्तूरीरंगन आयोग के रिपोर्ट पर आधारित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और उभरते भारत का भविष्य। पूर्व में भारत ने अनेक शिक्षा नीति का आरंभ किया। परंतु आज भी कुछ देशों का अपवाद छोड़ दे तो भारत विश्व का सर्वाधिक निरक्षरता वाला देश है। 

सन 2001 से संचालित सर्व शिक्षा अभियान और 2010 में लागू शिक्षा का अधिकार कानून अब भी देश में अभिवंचित वर्ग के बच्चों को विद्यालय से नहीं जोड़ सका है। ड्रॉपआउट तो बिल्कुल नहीं रुका है। ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्र में सबसे कमजोर वर्गों के बच्चे तो अब भी शिक्षा से काफी पीछे छूटे हुए हैं। 

शिक्षा का अधिकार कानून से कुछ बदलाव आया हो मोदी सत्ता में ऐसा तो कहीं भी नहीं दिखा। 30 बच्चे पर एक शिक्षक का अनुपात किसी भी स्कूल में अभी नहीं है। और कार्यशैली को आभास होता है कि भविष्य में कभी होगा इस पर अतिशयोक्ति है। क्योंकि वर्तमान मोदी सरकार ने अपने शासनकाल में शिक्षा के लिए अधिकार कानून के तहत कोई कार्य किया है ऐसा प्रतीत नहीं होता।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार कानून 2010 दोनों केबीच सामंजस्य होगा

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार कानून 2010 दोनों के समंजन के बारे में शिक्षा नीति में किस प्रकार की व्यवस्था होगी यह साफ नहीं है। क्या सरकार शिक्षा का बजट 6% करेगी जो कि अनिवार्य है। और संस्कृत विषय एक भाषा के रूप में रखना क्यों अनिवार्य है क्या इस संस्कृत शिक्षा से कोई वैज्ञानिक डॉक्टर इंजीनियर या एग्जीक्यूटिव कुछ भी बन सकता है।

मनुस्मृति का पालन और प्रचार केवल और केवल संस्कृत भाषा के शिक्षा से ही हो सकती है। नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा केवल उच्च वर्गों के लिए होगा या गरीब और मध्यम वर्ग को भी उच्च शिक्षा से जोड़ा जाएगा यह देखना अभी बाकी है। शोध के लिए अलग से कमीशन बनाने से क्या गरीब तबके के शोधार्थियों को उचित अवसर मुहैया कराई जा सकेगी। बीच में पढ़ाई छोड़कर सर्टिफ़िकेट और डिप्लोमा प्राप्त विद्यार्थियों को इस देश के सरकार या निजी कंपनियां नौकरियों पर रखेगी यह भी एक सवाल है। 

मसलन, वर्तमान सरकार द्वारा चलाया गया समग्र शिक्षा अभियान की तरह नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ढोल भी बजेगा या फट जाएगा यह भविष्य बताएगा। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह शिक्षा नीति अंधभक्ति और धर्मांधता को छोड़कर भारत के आने वाली पीढ़ियों को वैज्ञानिक सोच और तर्कपूर्ण विचार वाला देश बना पाएगा।

-बिद्रोही।

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