मछली उत्पादन

खनिज बाहुल्य झारखण्ड को अब हेमन्त मछली उत्पादन का भी दिलाएगें पहचान -मिलेगा रोजगार

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झारखण्ड को हेमन्त सोरेन बेहतरीन मछली उत्पादन का भी दिलाएगें पहचान, मांग के अनुरूप होगा उत्पादन, मिलेगा बेरोजगारों को रोजगार

उपराजधानी दुमका के तर्ज पर चाईबासा में भी बनेगा मछली बाजार, सीएम ने दिए निर्देश

रांची. वैश्विक स्तर पर अबतक झारखण्ड राज्य की पहचान खनिज संसाधन से ही होती रही है. राज्य भर में सभी क्षेत्रों में ऐसे-ऐसे खनिज दबे है, जिससे राज्य का विकास और हो सकता है. इसी खनिज के बल पर पूर्व की सरकारों ने झारखण्ड को विकसित करने के दावे भी किये. हालांकि, तमाम दावे खनन लूट के शिकार हुए. लेकिन इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कई तरह की समस्याएं सामने आयी. जिसमे परम्परागत रोजगार छिनना, विस्थापन की समस्या प्रमुखता से शामिल हैं. 

मौजूदा दौर में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड के भविष्य के लिए अलग राह पकड़ी है. जहां राज्य की पहचान अब केवल खनिज संसाधनों से ही नहीं, मछली पालन व रोजगार के अन्य माध्यमों से भी होगा. इसी दिशा में हेमन्त सरकार में महत्वपूर्ण प्रयास हो भी रहे हैं. इसके संकेत राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस-2021 के अवसर पर, 24 जिला के मछली पालकों एवं लाभुकों को ऑनलाइन संबोधित करते हुए हेमन्त सोरेन ने दिया है. सीएम ने कहा है कि मछली उत्पादन के मद्देनजर राज्य सरकार पहले प्रमुख शहरों का आकलन कर दिखेगी कि विश्व में कैसी मच्छलियों की मांग है.

हेमन्त की सोच -आजीविका एवं आर्थिक स्वावलंबन का वाहक बन सकता है मछली पालन 

सीएम ने कहा है कि झारखण्ड में जलाशयों की कमी नहीं है. ग्रामीणों की सहभागिता से झारखण्ड मछली उत्पादन में अग्रणी राज्य बन सकता है. इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वरोजगार मिलना आसान हो जाएगा. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों के लिए मछली पालन आजीविका एवं आर्थिक स्वावलंबन का वाहक बन सकता है. इसी मंशे के तहत उनकी सरकार का प्रयास है कि देश-दुनिया में झारखण्ड मत्स्य पालकों, पशुपालकों और प्रगतिशील किसानों वाले राज्य के रूप में भी अपनी पहचान बनाये. 

राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस-2021 के मौके पर लाभुकों के बीच 6.40 करोड़ रुपये की 16 प्रकार की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. इसमें मछली के जीरा के लिए फीड, बीज उत्पादन हेतु फ्राई कैचिंग नेट, ग्रो-आउट नेट, मछली का स्पान, मछली पालन के लिए बायोफलाक, मछली बीज उत्पादन के लिए हैचरी, तालाब निर्माण के लिए अनुदान प्रमुखता से शामिल हैं. 

मांग के अनुरूप मछली उत्पादन के लिए होगा अन्य शहरों का सर्वें

झारखण्ड को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री केवल दावा ही नहीं कर रहे, बल्कि इसपर काम भी शुरू किया गया है. सीएम की सोच है कि राज्य में बाजार में मछली के प्रकारों की मांग के अनुरूप मछली पालन को बढ़ावा मिले. इसके लिए देश के विभिन्न बड़े मछली बाजार का आकलन और सर्वे किया किया जा रहा है. विश्व में किस मछली की मांग अधिक है, किसके व्यापार में अधिक फायदा है, इसके आकलन के लिए कोलकाता, दिल्ली, बेंगलुरू के मछली बाजार का अध्ययन करना शामिल हैं. 

दुमका की तर्ज पर चाईबासा में भी बनेगा मछली बाजार, लाभुकों को जलाशयों में मछली पालन पर जोर

सीएम ने कहा कि मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कोल्हन प्रमंडल के मुख्यालय में मछली बाजार खोला जाएगा. इस बाबत मुख्यमंत्री द्वारा चाईबासा डीसी को उपराजधानी दुमका की तर्ज पर मछली बाजार बनाने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा सीएम ने मछली पालन से जुड़े लोगों से अपील की है कि वे खाली पड़े सभी जलाशयों में मछली पालन करें. राज्य सरकार की तरफ से उन्हें हर तरह से सहयोग किया जाएगा. साथ ही सीएम ने बंद हो चुके खुले खनन क्षेत्र में डीएमएफटी से केज कल्चर को बढ़ावा देने की भी बात कही हैं.

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