फूट, झूठ व लूट पर आधारित बीजेपी राजनीति को कर्नाटक ने नकारा

कर्नाटक चुनाव : जनता के विकसित चेतना के आगे भ्रम, झूठ, लूट व फूट ने दम तोड़ दिया. जन फैसले ने न केवल बीजेपी की नैया डुबोया, 2024 के आम चुनाव में जीत के सपनों के भी पर क़तर दिए.

राँची : योगी सत्ता में महीला उत्पीडन की पराकाष्ठा व कर्नाटक में 40% कमीशन वाली बीजेपी सत्ता के सच तले, कर्नाटक चुनाव के दौरान बीजेपी के शीर्ष नेतृव के द्वारा ऐसा माहौल बनाया गया कि मोदी सत्ता में देश में महँगाई, बेरोज़गारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, दलित-आदिवासी हिंसा व पिछड़ों के अधिकार हनन जैसी समस्याएँ हल हो चुकी है. और देश में न बच्चे कुपोषित हैं, न कोई भूखा है. सभी को शिक्षा व चिकित्सा मुफ्त मुहैया हो रही है. और साहेब यह उपलब्धि देश को बता रहे हैं.

फूट, झूठ व लूट पर आधारित बीजेपी राजनीति को कर्नाटक ने नकारा

जबकि तमाम कडवी सच्चाईयों के बीच प्रधान सेवक के द्वारा देश में सबसे बड़ी समस्या गोमाता पर ख़तरा. हिन्दू धर्म पर ख़तरा. केरला फ़ाइल फिल्म के आधार पर साहेब के द्ववारा संघ जनित झूठे मुद्दों के आसरे डर की खेती करने का प्रयास हुआ. और तमाम परिस्थितियों के बीच देश ने पहली बार यह भी जाना कि विभाजन व फूट पर आधारित सामन्ती मुद्दों को परोसने में केवल भाजपा-संघ के आईटी सेल, गोदी मीडिया व कॉर्पोरेट के धन की भूमिका ही नहीं, सनेमा निर्माता भी सक्रीय है. 


लेकिन, देश में पहली बार अंधभक्ति का धुंध छटता दिखा. कर्नाटक की जनता के विकसित चेतना के आगे भ्रम, झूठ, लूट व फूट ने दम तोड़ दिया. बीजेपी राजनीति के तमाम मुद्दे खोखला साबित हुए. विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के फैसले ने न केवल बीजेपी की राजनीतिक नैया डुबोया, 2024 के आम चुनाव में जीत के सपनों के भी पर क़तर दिए. क्योंकि मौजूदा दौर में बीजेपी राजनीति के  पास न राज स्तरीय असरदार नेता बचे हैं और ना ही अधिक बीजेपी शासित राज्य.

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