कभी घने जंगलों के लिए चर्चित था झारखण्ड, नई पर्यटन नीति झारखण्ड को दिलाएगी वही अलग पहचान

सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर सीएम ने जारी की नई पर्यटन नीति – 2021, धार्मिक से लेकर माइनिंग टूरिज्म तक को बढ़ावा देने के लिए तैयार है रोड मैप, रोजगार आधारित विकास का खुलेगा द्वारा…

हेमन्त सरकार की पर्यटन नीति झारखण्ड को देश-दुनिया में दिलाएगी अलग पहचान

रांची : झारखण्ड हजारों सालों से घने जंगलों के कारण देश-दुनिया में चर्चित रहा था, लेकिन पूर्व की सरकारों के लूट के अक्स में राज्य में जंगलों की अँधा-धुंध कटाई की नई रेखा खीची गयी. जिससे राज्य की पारंपरिक-आर्थिक, सांस्कृतिक व सामाजिक धरोहर छिन्न-भिन्न हुए, इनकार नहीं किया जा सकता. लेकिन मौजूदा हेमन्त सरकार में राज्य की प्राकृतिक सम्पदा को फिर से संवारने की कवायद तेज हो चली है. राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर नई पर्यटन नीति-2021 लॉन्च किया गया है. नई पर्यटन नीति-2021 में गढ़े अक्षरों से साफ है कि झाऱखण्ड अब फिर से देश-दुनिया में अपनी वही अलग पहचान बनाने को आतुर है. 

इस नीति के तहत खनिज संसाधनों को नुकसान पहुंचाये बिना सरकार का पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य में पर्यटन की असीम संभावना है. राज्य में नेतरहाट में खुबसूरत पहाड़ी है तो पतरातू, चांडिल और मसानजोर जैसे विशालकाय डैम भी हैं. राज्य में कई धार्मिक स्थल के साथ खनिज (माइनिंग) संपदा से घिरे क्षेत्र है. मसलन, राज्य में पहली बार प्रकृतिक के अलावे धार्मिक और माइनिंग टूरिज्म को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नीति में सब्सिडी की भी बात की गयी है. जिससे सुनिश्चित होता है कि मौजूदा सरकार की नीति में राज्य के विकास की डगर लाखों लोगों के रोजगार मुहैया जैसे जन कल्याण से हो गुजरेगा. 

निजी क्षेत्र को भी किया गया है आमंत्रित, सब्सिडी व पर्यटकों के सुरक्षा पर विशेष जोर

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य में पहली बार नीजि क्षेत्र को सरकार ने आमंत्रित किया है. न केवल देशी बल्कि विदेशि इन्वेस्टरों को भी पर्यटन के क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा. इन्वेस्टरों के लिए सब्सिडी का भी प्रावधान है. यह कुल निवेश की सीमा का 25 प्रतिशत तक होगा. सब्सिडी की अधिकतम सीमा 10 करोड़ रुपये तक की गयी है. 

नयी पर्यटन नीति में हेमंत सरकार ने पर्यटन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और सूचना केंद्र बनाने पर भी जोर दिया है. जिससे पर्यटकों को हर तरह की सेवाएं मिलना आसान हो पाएगा. वहीं पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए उनकी सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी गयी है. इसके लिए सरकार एक सुरक्षा बल का भी गठन करेगी. सुरक्षा बलों में सेवानिवृत्त जवानों को रखा जाएगा. उन्हें सरकार विशेष प्रशिक्षण भी देगी. 

अनुसूचित क्षेत्रों वाले पर्यटन केन्द्रों के विकास पर सरकार का विशेष जोर, दिया जाएगा इन्सेन्टिव

नई पर्यटन नीति में अनुसूचित क्षेत्र के पर्यटन केन्द्रों पर निवेशकों को अतिरिक्त 5% इंसेंटिव दिया जायेगा. नए टूरिज्म यूनिट शुरू करने पर बिजली दरों में 30% तक की छूट मिलेगी. निवेशकों को लोन इंटरेस्ट में 50% सब्सिडी यानी कि अधिकतम 25 लाख रूपये तक की सुविधा 5 वर्षों के लिए दी जायेगी. सरकार के प्रयास से देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए झारखण्ड के 230 से अधिक पर्यटन स्थलों का चयन कर विकास किया जा रहा है. वहीं अपने लक्ष्य के अनुरूप पर्यटन क्षेत्र में 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर (प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से) सृजित किये जाएंगे. 

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा लिए हैं कई अहम फैसले…

  • आइटीडीसी और जेटीडीसी के बीच होटल अशोका के स्वामित्व को लेकर एमओयू किया गया. पर्यटन विभाग की पहल पर होटल अशोका की 51 फीसदी हिस्सेदारी को लेकर जो एमओयू हुआ है, उसके माध्यम से झारखण्ड ने टूरिज्म के क्षेत्र में पहला पड़ाव हासिल किया.
  • लातेहार, नेतरहाट, बेतला, चांडिल, दलमा, मिरचैया, बेतलसूद को इको टूरिज्म के तौर पर विकसित किया जाने का फैसला.
  • नेतरहाट में चीड़ के पेड़ और मैग्नोलिया सनसेट पॉइंट को पर्यटकों के लिए खास तौर से विकसित किया जा रहा है.
  • झारखण्ड को फूलों की घाटी बनाने की भी तैयारी है. राज्य में कई ऐसी जगहें हैं, जहां, खूबसूरत झील-झरने और फॉल हैं लेकिन प्रदेश की जनता ही इनसे अनभिज्ञ है. 
  • सरकार ने पर्यटन स्थलों को कई श्रेणियों में बांट कर काम करने का फैसला किया है. इसमें धार्मिक, इको-कल्चरल, रूरल, माइनिंग टूरिज्म शामिल हैं.

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