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जेपीएससी-जेएसएससी का परीक्षा न लेने जैसे झारखंड के दुर्भाग्य से हेमंत ने दी मुक्ति

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मुख्यमंत्री ने कैलेंडर बनाकर नियमित रूप से प्रतियोगिता परीक्षाएं आयोजित करने के जेपीएससी-जेएसएससी को दिए कड़े निर्देश, परीक्षा में जाति, आवासीय एवं आय प्रमाण पत्र बाधित न हो, इसके लिए लंबित आवेदनों के निपटारे का भी निर्देश

कोरोना ने रोकी रफ्तार, वरना अब तक प्रतियोगिता परीक्षायें लेने की हो चुकी होती शुरूआत 

राँची। झाऱखंड का दुर्भाग्य है कि राज्य गठन के 20 साल बाद भी दो बड़ी संवैधानिक संस्था झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएसएसी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) हमेशा विवादों से घिरी रही है। विडंबना है कि राज्य में भाजपा के 14 वर्षों के लम्बे शासन में कभी ये दोनों संस्थाएं प्रतियोगिता परीक्षा आयोजन नियमित नहीं कर पायी। नतीजतन इसका सीधा प्रभाव ऐसे झारखंडी छात्र-छात्राओं पर पड़ा, जो राज्य के भविष्य थे और अपने कर्म से राज्य के विकास के पहिए घुमा सकते थे।

दबे-कुचले या आरक्षित कोटे से आने वाले युवाओं को इसका ज्यादा असर पड़ा हैं। आरक्षण का अर्थ होता है समाज में गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे लोगो को आर्थिक समस्या से मुक्त कर मुख्य धरा में लाना और देश की दुनिया भर में शाख मजबूत करना। राज्य का दुभाग्य है कि भाजपा ने इस समुदाय के प्रमाण पत्र निर्गत को कभी प्रमुखता नहीं दी। और इन समुदायों के युवा राज्य के विकास में अपना योगदान देने से महरूम रहे। जो जेपीएससी-जेएसएससी के समक्ष विवादों का एक बड़ा कारण बन कर सामने आती रही। 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 29 दिसम्बर 2020 को शपथ लेते ही जेपीएससी/जेएसएससी के समक्ष आने वाली तमाम समस्याओं को दूर करने का बीड़ा उठाया। बीते दिनों कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े शब्दों में स्पष्ट निर्देश दिये कि संस्थाओं की सभी प्रतियोगिता-परीक्षाएं ससमय आयोजित हो, यह सरकार की प्राथमिकता है, अधिकारी इस दिशा में संकल्पित हो कार्य करें। मसलन, हेमंत सोरेन की यह पहल साफ संकेत देते हैं कि राज्य को इस बदनामी से जल्द मुक्ति मिलेगी। 

कोरोना बना रोड़ा नहीं तो अब तक युवाओं को जेपीएससी-जेएसएससी के प्रतियोगिता परीक्षाओं में बैठने का मिल चुका होता मौका

जेपीएससी/जेएसएससी

अपने घोषणा पत्र में जेएमएम ने इन संवैधानिक संस्थाओं के द्वारा ली जाने वाली प्रतियोगिता परीक्षा को नियमित करने का वादा किया था। इस पहले कि हेमंत सरकार वादों को पूरा करती, कोरोना महामारी ने मनसूबे पर पानी फेर दिया। खुद कोरोना को एक्ट ऑफ़ गॉड कहने वाले विपक्ष भले ही इसके आड़ में अपनी राजनैतिक रोटी सेके, लेकिन प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले झारखंडी छात्र-छात्राएं असल सच को जानते और मानते हैं। इस बीच अच्छी खबर यह है कि कोरोना के घटते प्रभाव के साथ हेमंत ने इस दिशा में अपनी गति तेज कर दी है। 

जेपीएससी-जेएसएससी जैसे संस्थाओं को अब कैलेंडर बनाकर नियमित रूप से आयोजित करनी होगी प्रतियोगिता परीक्षाएं 

विभागीय समीक्षा में हेमंत ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि जेपीएससी एक कैलेंडर बनाकर नियमित रूप से प्रतियोगिता परीक्षाएं आयोजित करे। साथ ही सभी विभागों में रिक्तियों की समीक्षा कर तमाम रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने की कवायद शुरू करें। हेमंत का मानना है कि विभागों में कर्मियों की कमी रहने के कारण कार्य बाधित होता है। वहीं जेएसएससी अंतर्गत प्रक्रियाधीन परीक्षाओं को लेकर हेमंत ने कहा कि रिक्त पदों के लिए जो भी प्रतियोगिता परीक्षाएं ली जानी है इन परीक्षाओं को ससमय आयोजित किया जाए।

आरक्षित छात्रों को प्रमाण पत्रों से न हो परेशानी : हेमंत 

मुख्यमंत्री ने सेवा देने की गारंटी अधिनियम के अंतर्गत सभी जिलों में जाति प्रमाण पत्र, स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र एवं आय प्रमाण पत्र के लंबित आवेदन के जल्द निपटारे का कड़े निर्देश अधिकारियों को दिया है। हेमंत जानते हैं कि आरक्षित व दबे-कुचले वर्ग के वैसे बच्चें जो प्रतियोगिता परीक्षा देते है, उनके लिए यह प्रमाण प्रत्र कितना मायने रखता है। इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा सभी जिलों के डीसी को एक निर्देश जारी करने का भी निर्देश हेमंत ने दिया।

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