झारखण्ड : जेपीएससी मामले में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा सदन में विपक्ष पर पलटवार 

भाजपा नताओं के जेपीएससी मामले में हस्तक्षेप करने, पीटी परीक्षा को रद्द करे और फिर से परीक्षा लेने के सवालों पर झारखण्ड के विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि जेपीएससी स्वतंत्र संस्था है. सरकारों के हस्तक्षेप के कारण जेपीएससी की परीक्षाओं पर प्रश्नचिह्न लगते रहे हैं. लेकिन इस जेपीएससी में सरकार का किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं रहा. सदन में बैठा कोई भी व्यक्ति इसकी पुष्टि कर दे कि सरकार ने हस्तक्षेप का प्रयास किया है. आज आदिवासी, दलित, पिछड़ा व कमजोर वर्ग के अभ्यर्थी आगे आ रहे हैं तो मनुवादी विचारधारा के लोगों के पेट में दर्द हो रहा है. 

विपक्ष अनेक विषयों पर आवाज़ उठा रहे हैं. लेकिन वे सत्ता को डिक्टेट नहीं कर सकते. सदन में कब क्या आएगा क्या नहीं यह सत्तारूढ़ दल की चिंता का विषय है. जेपीएससी से जुड़ी पुरानी बातों को कुरेदना मेरा स्वभाव नहीं. पिछली सरकार के कार्यकाल में हमने विपक्ष रहते जेपीएससी का मामला उठाया था. उस जेपीएससी का हश्र यह है कि उसके अध्यक्ष आज जेल में हैं. कई पदाधिकारी गंभीर रूप से जांच के दायरे में हैं. पिछली सरकार पांच सालों में न परीक्षा ले पाई ना ही रिजल्ट दे पाई. इस जेपीएससी में रिजर्व अभ्यर्थी ने अपने परिश्रम के बल पर सामान्य वर्ग में जगह बनायी है तो इसमें सरकार की क्या गलती है. 

जेपीएससी मामले में विहिप के नौजवानों व भाड़े के लोगों को बैठाया गया है धरना पर 

विपक्ष द्वारा विहिप के नौजवानों व भाड़े के लोगों को बुलाकर धरना पर बैठाया गया है. आंदोलन कर रहे लोगों को पिछले दरवाजे से फाइनेंस हो रहा है. अनाज, तेल, पानी पहुंचाया जा रहा है. विपक्षी को इंगित करते हुए सीएम ने कहा कि इनका पाप हम अपने कंधे पर ढो रहे हैं. रघुवर को जेपीएससी व जेएसएससी का भी अंतर नहीं पता है. अभी जेपीएससी की स्थिति यह है कि पहली बार देश में इतने बड़े पैमाने पर अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. क्योंकि इस बार निशुल्क फार्म भरने का मौका दिया गया. 

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कहीं कह रहे थे कि जेपीएससी का मुद्दा गरमाया हुआ है. उन्हें तो जेपीएससी और जेएसएससी का अंतर तक पता नहीं है. मसलन, शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन भी विपक्ष ने हंगामा किया. और एक घंटे के लिये सदन की कार्यवाही स्थगित हुई. मुख्यमंत्री का प्रश्न काल भी नहीं हो सका. दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू होने पर मुख्यमंत्री ने जवाब दिया.

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