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केंद्र

गिरती अर्थव्यवस्था के बीच झारखंड की राजकोषीय व्यवस्था बिगाड़ने की रची गयी है गहरी साजिश

देश की गिरती अर्थव्यवस्था के बीच राजकोषीय व्यवस्था बिगाड़ने की रची गयी है गहरी साजिश – हेमंत की झारखंडी हितों की लड़ाई फिर भी जारी 

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन का राज्य पर पड़ा बुरा असर, प्रभाव कई दिनों तक बने रहने के असर।

रांची।  कोरोना संक्रमण को रोकने के नाम थोपे गये बेप्लानिंग लॉकडाउन ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाया है। खाली खजाने की श्राप झेल रहे झारखंड को कोरोना की मार ने पूरी तरह से चरमरा दिया है। देश की विश्वसनीय बैंक “भारतीय स्टेट बैंक” की शोध शाखा “एसबीआई इको” ने अनुमान जताया है कि लॉकडाउन की पहली तिमाही में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) साल का 14 फ़ीसदी कम हो गया है। 

शोध के मुताबिक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 47 करोड़ से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया है। इतनी त्रासदी के बीच भी झारखंड में भाजपा राजनीति करने से नहीं चूक रही। झारखंड को बर्बाद करने के लिए पहले तो केंद्र ने कोल ब्लॉक आवंटन की चाल चली। जब मोदी सत्ता के हाथ नाकामी लगी तो वह प्रदेश के राजकोषीय व्यवस्था आसंतुलित करने की एक और गहरी साज़िश रची है। 

लेकिन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हार न मानने वाले राजनेता साबित हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह न केवल भाजपा द्वारा लागाये गए कलंकों धोयेंगे बल्कि झारखंड के अधिकारों के लिए हर साज़िश से लड़ेंगे। 

रघुवर के समय का त्रिपक्षीय समझौते का हवाला दे काटे गए 1417 करोड़

हेमंत सरकार द्वारा जारी श्वेत पत्र में साफ़ जिक्र था कि हेमंत सोरेन का मुख्यमंत्री पद संभालते वक़्त न केवल राज्यकोष का खजाना पूरी तरह खाली था बल्कि राज्य पर 33,000 करोड़ से ज्यादा कर्ज भी चढ़ा दिया गया था। जो हेमंत सरकार के लिए चुनौती से कम नहीं था। अभी सत्ता संभाले चंद माह भी नहीं हुए थे कि कोरोना की अचानक मार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से चौपट कर दिया। 

लेकिन, हेमंत सरकार ने भाजपा के मोदी सत्ता की तरह कभी यह नहीं कहा कि यह एक्ट ऑफ़ गॉड है। अपनी विश्वास व मेहनत से यह कर के उन्होंने दिखाया कि सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य को न केवल संभाला जा सकता है बल्कि संकट से उबारा भी जा सकता है। जो शायद यह केंद्र की भाजपा को पच नहीं रहा है और लगातार झारखंड की व्यवस्था को असंतुलित करने के लिए साजिशें रच रही है। 

एक तरफ झारखंड भाजपा के रघुवर दास लगातार झारखंड सरकार के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करने से नहीं चुक रहे, तो दूसरी तरफ केंद्र की मोदी सत्ता ने डीवीसी बकाये, जो उनकी ही डबल इंजन सरकार की पाप है – त्रिपक्षीय समझौते का हवाला देते हुए राज्य के हिस्से का 1417 करोड़ रूपये तानाशाह तरीके से काट लिया है। मसलन, भाजपा की मोदी सत्ता देश के इतिहास की पहली ऐसी सत्ता है जिसने संकट में राज्यों को मदद देने के बजाय उसके खून चूसने पर अमादा है।   

74,582 करोड़ बकाया लौटाने के बजाय 1417 करोड़ उलटे काट लेना यकीनन साज़िश है   

राज्य की पिछली रघुवर सरकार द्वारा 27 अप्रैल 2017 को केंद्र और डीवीसी के बीच किया गया त्रिपक्षीय समझौता झारखंड में विवाद का केंद्र गया है। इसी समझौते के तहत केंद्र ने वर्तमान सत्ता के कार्यकाल में राज्य के हिस्से से 1417 करोड़ रूपये काटे हैं। जबकि ज्ञात हो कि यह वही केंदीय सत्ता है जो राज्य के 74500 करोड़ रूपए बकाये देने में आनाकानी कर झारखंड को संकट के बीच न केवल बेसहारा छोड़ दिया है बल्कि अपनी जिम्मेदारी से भी भाग रही है। जो यकीनन साजिश का हिस्सा हो सकता है। 

राज्य का केंद्र पर कुल 74582 करोड़ रुपये बकाया :

  • राज्य का केंद्र पर सिर्फ जीएसटी मुआवजा के मद में 2,982 करोड़ रुपये बकाया है।
  • खान विभाग का विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों पर 38,600 करोड़ रुपये बकाया है। प्रदेश गठन होने को 20 साल पूरे होने को है। लंबे समय तक सत्ता में रही भाजपा ने झारखंडी हित में लेने का कभी भी प्रयास नहीं किया। 
  • विभिन्न कोल कंपनियों द्वारा राज्य से अधिग्रहित भूमि के लगान के रूप में 33,000 करोड़ रुपये बकाया है। जिसमे हेमंत पिछले दिनों 250 करोड़ रुपये लेने में सफल हुए है। 

राजकोषीय व्यवस्था असंतुलित करने की सुनियोजित कोशिश भाजपा को राज्य हित में बंद करना चाहिए 

बहरहाल, बकाया राशि के नाम पर पहले किश्त में 1417 करोड़ केंद्र द्वारा कटा लिए के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ़ तौर से भाजपा सरकार को चेताया है कि प्रदेश की राजकोषीय व्यवस्था को असंतुलित करने की सुनियोजित प्रयास अतिशीघ्र बंद करे। पहले ही भाजपा की डबल इंजन सरकार ने राज्य की अस्मिता गिरवी रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पूर्व की रघुवर सरकार द्वारा संघीय ढांचे को चोट पहुंचाने के कारण राज्य आज दोराहे पर आ खड़ा हुआ है। हम हार नहीं मानेंगे और झारखंड के अधिकार हर हाल में लेंगे, चाहे इसके लिए कितनी ही लम्बी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।

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