जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम – झारखण्ड के भविष्य के लिए हेमन्त सरकार की ठोस सोच

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जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम

हेमन्त सरकार का जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम के तहत अनुसूचित जनजाति के छात्रों को उच्च शिक्षा में मदद न केवल आदिवासी समाज को त्रासदी से बाहर निकालेगा, झारखंड के लिय बड़े अवसर के द्वार खोलेगा. साथ ही यह सोच अन्य छात्रों को भी आगे बढ़ने को करेगी प्रेरित

हमारे विद्वान, अगुआ… हमारे आदरणीय मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा जी की याद में हमारी सरकार ने जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम का प्रारंभ किया है. यह देश की पहली ऐसी योजना है और झारखण्ड देश का पहला राज्य है जो आदिवासी समाज के छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दे रहा है. हमें उम्मीद है, आने वाले दिनों में अन्य छात्रों को भी इनसे प्रेरणा मिलेगी और आदिवासी समाज के युवा विश्व पटल पर हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार, हमारे समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे और देश सहित राज्य का नाम रोशन करेंगे

मुख्यमंत्री, हेमन्त सोरेन, झारखंड 

झारखंड की महान प्राकृत संस्कृति का सनातनी सच – जब भी झारखंडियों को मौका मिला अपना परचम लहराया

झारखंड की महान प्राकृत संस्कृति का सनातनी सच है कि जब-जब झारखंडियों को मौका मिला है उन्होंने इतिहास रचा है, परचम लहराया है. और उस चेतना को अगली पीढ़ी तक भी पहुंचाया है. भगवान बिरसा हों या मारंङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा, झारखंड की आन के लिए अंत तक लडे. जयपाल सिंह मुंडा को मौका मिला तो उन्होंने ओलंपिक हॉकी में स्वर्ण पदक जीत देश का नाम रौशन किया. संविधानसभा तक पहली बार आदिवासियों की त्रासदी पहुंचाए, अलग झारखंड की मशाल को लेकर आगे बढ़े. बाद में उस मशाल को दिशोम गुरू शिबू सोरेन व विनोद बिहारी महतो जैसे झारखंडी बेटों ने अंजाम तक पहुंचाया.

मौजूदा दौर में, उस संस्कृति के मशाल को मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन अपने हाथों में लेकर आगे बढ़ चले हैं. ठीक 100 बरस बाद हेमन्त सोरेन मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के उस सोच को लेकर भी आगे बढ़े हैं. जिसके अक्स में ज्ञान/शिक्षा की रौशनी के रूप में झारखंड का सुनहरा भविष्य झलता है. जो मौजूदा सरकार की मंशा को भी दर्शाता है. हालांकि, यह प्रयास अलग झारखंड के साथ ही शुरू होना चाहिए था, लेकिन पूर्व की सरकारों में न वह सोच दिखी और न इच्छाशक्ति. हेमन्त सरकार ने जयपाल सिंह मुंडा के उस दूरदर्शी सोच को स्कॉलरशिप स्कीम के रूप में धरातल पर उतारा है. जिसके कैनवास में आदिवासी छात्र शिक्षा ग्रहण कर भविष्य के झारखंड को गढेंगे.

जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम के लाभुकों को हेमन्त सरकार करेगी सम्मानित

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री गुरुवार, 23 सितंबर को रांची में मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम के लाभुकों एवं उनके माता-पिता को सम्मानित करेंगे. साथ ही स्कॉलरशिप से लाभान्वित लाभुकों के बीच प्रशस्ति पत्र का वितरण करेंगे, उन्हें सम्मानित करेंगे. ज्ञात हो, मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह शुरुआत भर है भविष्य में इस स्कीम से अनुसूचित जाति वर्ग को भी जोड़ा जाएगा.

मारंङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम के कैनवास में झारखण्ड के 11 अनुसूचित जनजाति छात्रों को हर वर्ष इंग्लैंड और आयरलैंड की यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिलेगा. हेमन्त सरकार द्वारा इस स्कीम के तहत इंग्लैंड एवं आयरलैंड की यूनिवर्सिटी में उच्च स्तरीय शिक्षा (मास्टर डिग्री, एम फिल) के लिए ट्यूशन फीस सहित उनके रहने एवं अन्य जरुरी खर्च वहन करेगी. स्कॉलरशिप के इस फेहरिस्त में 6 छात्रों का चयन कर लिया गया है. जो सितंबर महीने में उच्च शिक्षा हासिल करने हेतु इंग्लैंड की 5 विभिन्न यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने जायेंगे.

स्कीम की घोषणा साल 2020 में हेमन्त सरकार द्वारा की गई थी  

ज्ञात हो, 28 दिसंबर 2020 को सरकार द्वारा कैबिनेट की बैठक में योजना को मंजूरी मिली थी, वहीं सरकार के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 29 दिसंबर 2019 को रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा मारंङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम का विधिवत उद्घाटन किया था. जिसके पश्चात 7 मार्च को स्कॉलरशिप स्कीम के योग्य लाभुकों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे. आवेदन प्राप्ति के मद्देनजर इस वर्ष 6 छात्रों का चयन किया गया है, जिन्हें इंग्लैंड में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप दी जा रही है.

जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम के लिए प्रथम वर्ष में 6 छात्रों का हुआ चयन

  1. हरक्यूलिस सिंह मुंडा – यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के स्कूल ऑफ ओरिएन्टल एंड अफ्रीकन स्टडीज में एमए की पढ़ाई करेंगे. 
  2. अजितेश मुर्मू – यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में आर्किटेक्चर में एमए की पढ़ाई करेंगे. 
  3. आकांक्षा मेरी – लॉ बॉर्ग यूनिवर्सिटी में क्लाइमेट चेंज साइंस एंड मैनेजमेंट में एमएससी के लिए हुआ है.
  4. दिनेश भगत – यूनिवर्सिटी ऑफ सस्सेक्स में क्लाइमेट चेंज, डेवलपमेंट एंड पॉलिसी में एमएससी की पढ़ाई करेंगे. 
  5. अंजना प्रतिमा डुंगडुंग – यूनिवर्सिटी ऑफ वार्विक में एमएससी की पढ़ाई करेंगी. 
  6. प्रिया मुर्मु – लॉ बॉर्ग यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव राइटिंग एंड द राइटिंग इंडस्ट्रीज में एमए की पढ़ाई करेंगी. 

यह स्कॉलरशिप स्कीम के तहत राज्य सरकार, अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले इन सभी छात्रों की विदेश में पढ़ाई का पूरा खर्च वहन करने के साथ उनके रहने एवं अन्य खर्च भी वहन करेगी.

आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा में मदद, झारखंड के सुनहरे भविष्य की मोटी लकीर में हेमन्त सरकार का सराहनीय योगदान …

आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा में मदद आदिवासी समाज के अन्य छात्रों को आगे बढ़ने की मिलेगी प्रेरणा : चयनित लाभुक छात्र.

हरक्यूलिस कहते हैं, जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम ट्राइबल बुद्धिजीवियों एवं स्कॉलर्स के लिए वैश्विक मंच साझा करने का एक जरिया बनेगा. साथ ही, मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे ऐसे लोगों की श्रेणी में आने का मौका मिलेगा जो अपने क्षेत्र में दक्षता रखते हैं. 

आकांक्षा कहती हैं, यह मेरे लिए बेहद ही खुशी का मौका है, जब मुझे इस स्कॉलरशिप के पहले बैच में चयनित होने का मौका मिला. मैं सरकार की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने ऐसी पहल करने की सोची जो छात्रों को जीवन में बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है. हमारे लिए यह एक बेहतरीन मौका है जब हमें वैश्विक मंच पर अपनी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हुए अनेकता में एकता के असल मायने को प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा.

“मुझे मारंङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम के पहले बैच का हिस्सा होने पर खुशी है. मेरा मानना है कि सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रओं को स्कॉलरशिप के माध्यम से उच्च शिक्षा में मदद देना एक बेहद ही महत्वपूर्ण कदम है. इससे न सिर्फ आदिवासी छात्रों को अपने टैलेंट को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा जिससे अन्य लोगों के लिए भी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने का रास्ता खुलेगा”, गुमला जिला की रहने वाली अंजना प्रतिमा डुंगडुंग ने कहा.

कौन थे मारंङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा

मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा – वर्ष 1922 से 1929 के बीच इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने वाले पहले आदिवासी छात्र थे. उन्होंने 1928 में हुए एम्सटर्डेम ओलंपिक में भारतीय राष्ट्रीय हॉकी टीम का भी प्रतिनिधित्व किया था. उनकी टीम ने ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था. आज लगभग 100 वर्ष बाद, मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की स्मृति एवं सम्मान में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आदिवासी छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा के लिए सहयोग हेतु जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप स्कीम की घोषणा की है.

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