जनता को दुखी नहीं देख पाना, मुख्यमंत्री का एक मात्र कमजोरी- भाजपा उसी कमजोरी को झूठ के सहारे बना रही है निशाना

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जनता को दुखी नहीं देख पाना

भाजपा व संघ को पता है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कमजोरी जनता को दुखी न देख पाना है. इसलिए वह बार-बार झूठ का सहारा लेते हुए जनता को ही डराने का प्रयास कर रही है. यह ठीक वैसा ही हो सकता है जैसे विलेन परिवार के सदस्यों का किडनैप कर हीरो को वश में कर लेते है. 

पांच बरस के रघुवर सत्ता में, नीतियो के एलान तले अगर जनता का न केवल पेट खाली रह जाए, भूख से मौतें भी हो जाए. युवाओं के हथेली में रोजगार नहीं बल्कि सांप्रदायिक मुद्दा थमा दिए जाए. और भक्त सरीके युवाओं को अनुबंध पर बंधुआ मजदूरी के झुन-झुने थमा खुश करने का प्रयास हो. जहाँ संघी मानसिकता का सच जाति या धर्म के आधार पर पार्टी के सांगठनिक स्ट्रक्चर को तैयार करने का हो. जिसके अक्स में भ्रम के आसरे लूट संस्कृति का काला खेल का सच हो. तो जाहिर है उस मानसिकता का अस्तित्व अधिक दिनों तक जनता के बीच नहीं टिकता.

यह एहसास बीजेपी और संघ परिवार को भी अब हो चला है कि जनता के बीच फैला भ्रम का तलिस्म टूट चुका है. और उस सत्ता या विचारधारा के लिए चुनाव में खुद को जिन्दा रखने के मद्देनजर, झूठ का सहारा लेना ही अंतिम सच बन गया है. यदि देश के स्तर पर इस परम्परा का स्पष्ट उदाहरण मोदी जी हो सकते हैं. तो झारखंड में निश्चित रूप से रघुवर दास को भी कतई कम नहीं आँका जा सकता. और इस फेहरिस्त में ताजा नाम अब दीपक प्रकास का भी जुड़ चूका है. जाहिर है जिस मानसिकता की ऐयासी का बुनियादी सच ही भ्रम फैला गरीबों की मेहनत के लूट पर टिकी हो. तो उसके नुमाइंदे सच तो चाह कर भी नहीं बोल सकते.

दीपक प्रकास ने फिर बोला सफ़ेद झूठ

ज्ञात हो, सर्वे रिपोर्ट से भाजपा को जब से पता चला है कि मुख्यमंत्री का मधुपुर में धमक उनके बचे खुचे जीत के सपनों को तोड़ सकता है. तो वह किसी भी उस हद तक जाने से नहीं कतरा रहे, जिससे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की वापसी संभव हो. नतीजतन भाजपा खेमा हर रोज कोई न कोई डर का प्रोपेगेंडा रच जनता को डराने का प्रयास कर रही है. क्योंकि उस मानसिकता को पता है कि मुख्यमंत्री का दुखती रग है कि वह जनता को दुखी में नहीं देख सकते. लिहाजा वह मानसिकता लगातार उस कमजोरी पर वार कर रही है.

मसलन, दीपक प्रकास झूठ की पराकाष्ठा पार करते हुए मीडिया में बयान दे दिए कि कोरोना महामारी के मद्देनजर झारखंड का स्थान देश में पांचवां है. जबकि कोई भी रिपोर्ट इसकी पुष्टि नहीं करती. रिपोर्ट के अनुसार 1. महाराष्ट्रा 2. दिल्ली 3. तमिलनाडु 4. राजेस्थान 5. मध्य प्रदेश 6. गुजरात 7. तेलंगाना 8. उत्तरप्रदेश 9. आंद्रप्रदेश 10. केरल है. ऐसे में क्या यह इस झूठ का वाजिब वजह मुख्यमंत्री की मौजूदगी से व्याप्त खौफ नहीं तो और क्या हो सकता है.

जनता को दुखी में होने आशंका में हेमंत सोरेन का जनता को सन्देश – कि भ्रमित न हों, वह उज्जवल भविष्य के साथ जीत भी उसकी झोली में अवश्य डालेंगे 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन – कृपया अफ़वाहों पर ध्यान ना दें। मैं लगातार हर वक्त राज्य के अधिकारियों से सम्पर्क में हूँ और पूरे राज्य की स्थिति पर नज़र रखते हुए ज़रूरी निर्देश दे रहा हूँ। कोरोना की स्थिति विकट अवश्य है, पर पिछले साल की तरह हम अपने सीमित संसाधनों के बावजूद हम आप सबको बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा एवं अन्य ज़रूरी संसाधन उपलब्ध कराने हेतु हर सम्भव प्रयास कर रहे हैं। कहीं अगर थोड़ी परेशानी हुई हो आपको तो इसके लिए क्षमा चाहूँगा पर साथ ही आपको विश्वास दिलाना चाहूँगा कि मैं और आपकी सरकार आपके साथ हर एक सुख दुःख में खड़े है।

पर इस संघर्ष की बेला में आपको भी अत्यंत सतर्क रहना है। बिना मास्क और ज़रूरी कार्य के अपने घरों से बाहर नहीं निकले। कोरोना से बचने के लिए जारी हर दिशा निर्देश का पालन करें।

विपक्ष के साथियों से कहना चाहूँगा की कृपया अपना राजनीतिक मतलब साधने राज्य हेतु भय का माहौल ना बनाएँ। जैसे बंगाल देश का हिस्सा है वैसे ही मधुपुर झारखण्ड का हिस्सा है और इलेक्शन कमीशन के आदेश और केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन कर ही चुनाव हो रहे है। 

पुनः समस्त राज्यवासियों से अपील करूँगा कि अपने और अपनों की सुरक्षा हेतु सिर्फ़ ज़रूरत पड़ने पर ही मास्क पहन घर से निकलें। घर के बुजुर्गों के स्वास्थ पर  विशेष नज़र रखें।

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