Intermittent – आंतरायिक उपवास प्रोपगेंडा फास्टिंग (Fasting) से बेहतर होता

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यदि भाजपा के सांसद-विधायक प्रोपगेंडा फास्टिंग के जगह आंतरायिक उपवास का प्रचार करते तो जनता के लिए बेहतर होती।

झारखंड के भाजपा विधायक सांसद ने प्रवासी श्रमिकों के लिए उपवास का नाटक किया, यह सुनकर आश्चर्य होता है। बेहतर होता कि वे  Intermittent – आंतरायिक उपवास (Fasting) को बढ़ावा देते। सभी नहीं, लेकिन कुछ लोगों को स्वास्थ्य लाभ ज़रुर होता। क्योंकि जनता को इस राष्ट्रीय नाकाबंदी में आभासी मदद की तुलना में अधिक ज़मीनी समर्थन की आवश्यकता है।

सच कहा गया है, सुर्खियों में बने रहने के लिए लोगों को आभासी दुनिया में लाना एक बेहतर विकल्प है। यही भाजपा झारखण्ड में कर रही है। क्योंकि, ऐसी ख़बरें थीं कि उनके नेता लगातार लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। जिसकी वजह से झारखंडी जनता कोरोना संक्रमण जैसी मुसीबत में पड़ सकती है। 

ऐसे में, यह भाजपा के प्रोपगेंडा के अलावा और क्या हो सकता है। दिलचस्प यह है कि,  इस ढोंग के बचाव में उनका कहना है कि हेमंत सरकार प्रवासियों को मदद नहीं पहुंचा रही है। जबकि, (In other words,) सच्चायी यह कि दिल्ली में फंसे सांसद वहां फंसे प्रवासियों की मदद करने के बजाय lockdown का उल्लंघन कर झारखण्ड पहुँच गए। 

Intermittent उपवास प्रोपगेंडा Fasting से बेहतर क्यों?

अब दूसरी मजेदार बात यह है कि भाजपा विधायकों के ढोंग (fasting ) पर कई महान भाजपा नेताओं का समर्थन भी मिला है। क्या इससे बेहतर यह नहीं होता कि ये Intermittent का प्रसार करते? क्योंकि (because,) यह पांच दिनों का उपवास द्वारा की जाने वाली एक उपचार पद्धति है। जिससे कुछ मरीज़ों को ज़रुर लाभ पहुँच सकता था। 

मसलन, (In conclusion,) झारखण्ड सरकार ने पिछले दिनों प्रवासी मज़दूरों को मदद पहुंचाने के लिए मोबाइल एप की शुरुआत की है। साथ ही वह अल्प संसाधन में भी देश भर के अपने तमाम नागरिकों को मदद पहुंचा रही है। भाजपा नेताओं को चाहिए कि वे इस संकट की घड़ी में प्रोपगेंडा (Intermittent fasting) छोड़ जनता के लिए सरकार के साथ खड़े हों। और केंद्र से संसाधन व बकाया भुगतान मुहैया करवाने में सरकार की मदद करे।

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